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सीएम अमरिंदर सिंह ने किया चुनाव आयोग का बचाव, कहा- अगर ईवीएम से छेड़छाड़ होती तो नहीं होता सत्ता में

अमरिंदर सिंह का यह रूख कांग्रेस के रूख के विपरीत है जिसका कहना है कि मशीन से छेड़छाड़ संभव है।
Author नई दिल्ली | April 13, 2017 06:34 am
पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने आज कहा कि अगर ईवीएम से छेड़छाड़ होती तो वह सत्ता में नहीं होते। उनका यह रूख कांग्रेस के रूख के विपरीत है जिसका कहना है कि मशीन से छेड़छाड़ संभव है। उन्होंने आज यहां कहा, ‘‘अगर ईवीएम से छेड़छाड़ की गई होती तो मैं यहां नहीं बैठा होता। यहां अकाली होते।’’ पूर्व कानून मंत्री वीरप्पपा मोईली के बाद अमरिंदर सिंह कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेता हैं जो ईवीएम के बचाव में उतरे हैं जबकि कांग्रेस का आरोप है कि मशीन से छेड़छाड़ हुई है। कांग्रेस ने मांग की है कि ईवीएम की जगह पुराने मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए। पंजाब में विधानसभा की 117 सीटों में से 77 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर एक दशक से सत्ता में काबिज अकाली…भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाया। कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर आरोप लगा रही है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ हुई जिससे उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा को विधानसभा चुनाव जीतने में सहयोग मिला।

इससे पहले चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों को ‘‘खुली चुनौती’’ देते हुए कहा कि आइए एवं ईवीएम हैक कीजिए तथा दिखाइए कि इन मशीनोंं से छेड़छाड़ की जा सकती है।वैसे आयोग अबतक सटीक तारीख तय नहीं कर पाया है लेकिन उसने कहा है कि यह चुनौती मई के पहले हफ्ते में होगी तथा दस दिनों तक चलेगी।पिछली बार 2009 में ऐसा ही कार्यक्रम हुआ था जब देश के विभिन्न हिस्सों से 100 ईवीएम मशीनें विज्ञान भवन में रखी गयी थीं। आयोग ने दावा किया था कि कोई भी इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन :ईवीएम:हैक नहीं कर पाया।जब दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल ईवीएम संबंधी शिकायत के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी से मिले थे तब उनसे कहा गया था कि आयोग ऐसी चुनौती पेश करने की योजना बना रहा है।इस बार इस कार्यक्रम का स्थल आयोग मुख्यालय निर्वाचन सदन होगा। ईवीएम पर आयोग की तकनीकी विशेषज्ञ समिति चुनौती संबंधी बिंदु तय करेगी तथा उसका ब्यौरा अगले कुछ दिनों में सार्वजनिक कर दिया जाएगा।इस बात की प्रबल संभावना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में इस्तेमाल में लायी गयी मशीनें चुनौती के लिए लायी जाएं। बसपा ने आरोप लगाया था कि छेड़छाड़ से गुजरी मशीनों ने भाजपा को चुनाव जिताने में मदद पहुंचायी।

नियमों के अनुसार इन मशीनों को 40 दिनों तक स्ट्रांग रूम से निकाला नहीं जा सकता है और इस अवधि के अंदर पीड़ित व्यक्ति संबंधित उच्च न्यायालय में चुनावी याचिका दायर कर सकता है। यह अवधि इस महीने बाद में खत्म हो जाएगी।आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘‘मई के पहले हफ्ते से विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीविद एक हफ्ते या दस दिनों के लिए आ सकते हैं और मशीनें हैक करने की कोशिश कर सकते हैं।’’ यह चुनौती हफ्ते या दस दिनों के लिए होगी।  इस बीच आम आदमी पार्टी ने इस चुनौती के बाद चुनाव आयोग से आधिकारिक संवाद की मांग की। आप नेता आशीष खेतान ने कहा, ‘‘क्या चुनाव आयोग ने कोई प्रेस विज्ञप्ति या आधिकारिक बयान जारी किया है। क्या यह एमसीडी चुनाव से पहले ऐसी खबर गढ़ने की कोशिश की जा रही है? हम इस विषय पर चुनाव आयोग से अधिकारिक बयान की मांग करते हैं। ’’

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