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स्वर्ण मंदिर में सेना का ऑपरेशन: अवैध ढंग से गिरफ्तार 40 लोगों को केंद्र सरकार ने दिया मुआवजा

स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन के दौरान अवैध ढंग से गिरफ्तार 40 लोगों को मुआवजा देने के लिए केंद्र सहमत हुआ है। अलगाववादियों से निपटने के लिए ब्लूस्टार नामक ऑपरेशन 1984 में हुआ था।

Author नई दिल्ली | July 2, 2018 4:07 PM
साल 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लूस्टार में 83 सेनाकर्मी और 492 नागरिक मारे गए थे। (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

स्वर्ण मंदिर में 34 साल पहले हुए ऑपरेशन के दौरान अवैध ढंग से गिरफ्तार 40 लोगों को मुआवजा देने के लिए केंद्र सहमत हुआ है। अलगाववादियों से निपटने के लिए ब्लूस्टार नामक ऑपरेशन 1984 में हुआ था। देश केअतिरिक्त सालिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने सोमवार को पंजाब तथा हरियाणा हाई कोर्ट को सूचित किया कि केंद्र सरकार ने मुआवजे के लिए कुल 2.16 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। दरअसल अमृतसर की एक अदालत ने पिछले साल ने पंजाब की राज्य और केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह सभी 40 सिखों को चार-चार लाख रुपये की दर से मुआवजा बांटे।आरोप है कि इन सिखों को अवैध ढंग से स्वर्ण मंदिर से गिरफ्तार कर अस्थाई हिरासत में रखा गया। यह कार्रवाई ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान हुई थी। अदालत के आदेश के बाद पंजाब सरकार ने 38 पीड़ितों को राज्यांश का भुगतान कर दिया।मुआवजे के संबंध में निचली अदालत के फैसले को पहले केंद्र ने चुनौती दी थी मगर बाद में केस वापस ले लिया। अब केंद्र ने हाई कोर्ट से मुआवजा देने पर सहमति जताते हुए पैसा जारी करने की बात कही है।

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बता दें कि सरकारी आंकड़े के मुताबिक आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर से कुल 1,592 सिखों को हिरासत में लिया गया था। छह जून 1984 को आपरेशन ब्लू स्टार खत्म होने के बाद उसमें से 379 लोगों को गिरफ्तार किया।इसमें से 365 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सभी के खिलाफ पहली बार किसी आपराधिक मामले में केस दर्ज हुआ था। जब सीबीआइ ने जांच शुरू की तो सभी के खिलाफ एक और केस दर्ज हुआ। उन्हें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोपी बनाया।1989 में भारत सरकार और अकाली नेताओं के बीच बातचीत के बाद आरोपियों पर से केस वापस लिए गए। जिसमें से कुछ विधायक, सांसद और मंत्री हुए तो कुछ ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नौकरी हासिल की। रिहा हुए कुल 365 आरोपियों में से 1991 में 71 ने केंद्र सरकार से मुआवजा मांगा। कहा कि उन्हें अमृतसर और जोधपुर में टॉर्चर किया गया।

सीबीआई जब यह केस जीतने में सफल रही तो फिर 71 में से 41 लोगों ने जिला एवं सत्र अदालत, अमृतसर में 2011 को सिविल अपील की। इस केस की सुनवाई के बाद जज गुरबीर सिंह ने केंद्र और राज्य को 40 पीड़ितों को चार-चार लाख रुपये की दर से मुआवजा देने का आदेश दिया। उधर जब केंद्र सरकार की ओर से अपना अंश देने में देरी की गई तो पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का एक बयान आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर केंद्र अपना शेयर नहीं देता तो पंजाब सरकार अकेले मुआवजा देगी।

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