Ambulance costly, man takes father dad body home on pushcart - पंजाब: एंबुलेंस के लिए नहीं थे 400 रुपए, रेहड़ी पर रखकर लाना पड़ा सरबजीत सिंह को पिता का शव - Jansatta
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पंजाब: एंबुलेंस के लिए नहीं थे 400 रुपए, ऑटो में रखकर लाना पड़ा सरबजीत सिंह को पिता का शव

पंजाब: एंबुलेंस के लिए नहीं थे 400 रुपए, रेहड़ी पर रखकर लाना पड़ा पिता का शव

इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है

पंजाब के जालंधर में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक बेटा पैसे की कमी के चलते हॉस्पिटल से अपने पिता के शव को एंबुलेंस में घर नहीं ला सका। सरबजीत सिंह जोकि हॉकी स्टिक बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं, ने गुरुवार (11 मई, 2017) को बताया कि उन्होंने स्ट्रोक से गुजर रहे अपने पिता लाल सिंह को सात मई को सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया लेकिन गुरुवार को उनकी मौत हो गई। जिसके बाद उन्होंने पार्क में खड़ी निजी एंबुलेंस से पिता के शव को घर ले जाना चाहा। लेकिन ड्राइवर ने इसके लिए 400 रुपए की मांग की। जबकि सरबजीत सिंह का घर हॉस्पिटल से महज 4 किमी की दूरी पर है। उन्होंने बताया कि उस दौरान मेरे पास महज 150 रुपए ही थे। ये बात सरबजीत सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताई हैं।

बाद में कृष्णा नगर में रहने वाले सबरजीत सिंह के पहचान वाले सब्जी बेचने वाली रेहड़ी लेकर आए जिसकी मदद से पिता के शव को घर पहुंचाया जा सके। इस दौरान हॉस्पिटल के गेट के बाहर सैकड़ों लोग वहीं मौजूद थे जो पूरे मामले को देख रहे थे। तब एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने शव को घर तक पहुंचाने की बात कही। जिसके बाद सरबजीत शव ऑटो रिक्शा में शव को घर लेकर आए। दूसरी तरफ सिविल हॉस्पिटल के मेडिकल चीफ केएस बावा ने मामले में बताया कि एंबुलेंस का इस्तेमाल केवल मरीजों को लाने के लिए किया जाता है। एंबुलेंस का इस्तेमाल शवों के लिए नहीं किया जा सकता।

बता दें कि इससे पहले बीते साल अगस्त (2016) में दाना माझी मामले ने देशभर को झकझोर कर रख दिया जिसमें वो अपनी पत्नी के शव को करीब 10 किलोमीटर लेकर पैदल चले थे। इस दौरान दाना माझी के साथ उनकी 12 साल की बेटी भी थी। माझी की पत्नी की मौत ट्यूबरक्लोसिस से हुई थी। इस घटना के एक महीने बाद एक अन्य मामला उड़ीसा हॉस्पिटल से सामने आया था जहां 65 की अपने मां के शव को एक शख्स साईकिल पर रखकर लाया था।

 

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