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पंजाब : 7 साल पहले एसिड अटैक में खो दी थी आंखों की रोशनी, हिम्मत दिखा बनीं बैंकर

7 साल पहले उन पर एसिड अटैक हुआ। यह हमला इतना खतरनाक था कि उनके चेहरे के साथ-साथ आंखों की रोशनी भी खराब हो गई। यह कहानी है मोहाली में रहने वाली इंद्रजीत कौर (30) की, जो एसिड अटैक पीड़ितों को वित्तीय मदद दिलाने के लिए सरकार तक से लड़ गईं। वे अब केनरा बैंक के दिल्ली ऑफिस में क्लर्क हैं।

Author December 27, 2018 3:26 PM
प्रतीकात्मक फोटो

7 साल पहले उन पर एसिड अटैक हुआ। यह हमला इतना खतरनाक था कि उनके चेहरे के साथ-साथ आंखों की रोशनी भी खराब हो गई। यह कहानी है मोहाली में रहने वाली इंद्रजीत कौर (30) की, जो एसिड अटैक पीड़ितों को वित्तीय मदद दिलाने के लिए सरकार तक से लड़ीं। वे अब केनरा बैंक के दिल्ली ऑफिस में क्लर्क हैं। इंद्रजीत कौर बताती हैं कि दिसंबर 2011 में उन पर एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में उनके चेहरे और शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ आंखों की रोशनी भी चली गई। मेरी मां के अलावा किसी भी रिश्तेदार ने मेरा साथ नहीं दिया। यहां तक कि आरोपियों के खिलाफ मेरी लड़ाई में मेरा भाई तक मेरा साथ नहीं था।

मैं पूरी तरह टूट गई थी : इंद्रजीत ने बताया, ‘‘मेरी पढ़ाई छूट गई थी और मैं पूरी तरह समाज से अलग हो गई थी। हालात इतने ज्यादा खराब थे कि मैं हर वक्त रोती रहती थी। गांव वाले और रिश्तेदार कहते थे कि मैं अपने परिवार वालों और समाज पर बोझ हो जाऊंगी। इसके बाद मैंने कुछ कर दिखाने का फैसला किया और देहरादून में नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर विजुअली हैंडिकैप्ड जॉइन कर लिया।’’

देहरादून में बदल गई जिंदगी : कौर के मुताबिक, इस इंस्टिट्यूट ने मेरा जीवन बदल दिया। मैंने यहां ऑडियो रिकॉर्डिंग से पढ़ने का तरीका सीखा और 2016 में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद मैंने बैंकिंग सर्विस के एग्जाम में हिस्सा लिया। दो बार मैं फेल हो गई, लेकिन तीसरी बार जून 2018 में मैंने यह टेस्ट भी पास कर लिया। मेरा चयन दृष्टिहीन वर्ग में किया गया था, जिसके बाद दिल्ली में पोस्टिंग मिली।

एकतरफा प्रेम में हुआ था एसिड अटैक : इंद्रजीत के मुताबिक, मोहाली के मरौली कलां गांव में रहने वाला मंजीत सिंह इंद्रजीत कौर से एकतरफा प्यार करता था। कौर ने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया तो उसने घर में घुसकर उन पर तेजाब डाल दिया था। इस हमले में कौर के चेहरे, गर्दन, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म हो गए थे।

 

बच्चों को पढ़ाती थीं इंद्रजीत : एसिड अटैक से पहले कौर टीचर थीं और छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाती थीं, लेकिन आंखों की रोशनी खोने उनकी आजीविका का यह माध्यम छिन गया। प्लास्टिक सर्जरी जैसा इलाज कराने में सक्षम न होने के कारण उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया और अपने इलाज एवं पुनर्वास के लिए मुआवजा मांगा। उनकी याचिका के बाद पंजाब-हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज और मुआवजे का नियम लागू किया गया।

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