भाजपा के पंजाब प्रमुख बने हुए केवल सिंह ढिल्लों अभी 3 महीने से अधिक ही हुआ है, इस दौरान उनका कार्यकाल काफी राजनीतिक हलचल हो रही है। जून 2022 में कांग्रेस से भाजपा में आए केवल सिंह ढिल्लों को संगठनात्मक बदलावों को लेकर पार्टी के “असली (टक्साली)” कार्यकर्ताओं की नाराजगी का खासा सामना करना पड़ा है। इन सभी मुद्दों को लेकर केवल सिंह ढिल्लों से द इंडियन एक्सप्रेस से बात की गई।
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई मुलाकात के बाद शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ फिर से गठबंधन की संभावना को लेकर भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ एक इंटरव्यू में, केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब में पार्टी के कामकाज, अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की रणनीति जैसे मुद्दों पर बात की।
सवाल- आपके कार्यकाल को अभी तीन माह ही हुई है ऐसे में भाजपा के अंदर काफी मतभेद नजर आ रहे हैं। नए संगठनात्मक ढांचे की घोषणा के बाद पैदा हुई नाराजगी को आप कैसे दूर कर रहे हैं?
केवल सिंह ढिल्लों ने जवाब देते हुए कहा- भाजपा परिवार दिन-प्रति-दिन बड़ा होता जा रहा है। मंगलवार को अकाली दल के एक पूर्व विधायक को उनके समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल किया गया। जब परिवार बढ़ता है तो मतभेद सामने आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई गंभीर समस्या है। मैं सभी के संपर्क में हूं। किसी को भी निराश होने की जरूरत नहीं है। हर वरिष्ठ नेता को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जाएगी।
बड़ा लक्ष्य विधानसभा चुनाव है। मुझे यकीन है कि नेता और कार्यकर्ता यह समझते हैं कि पंजाब में “डबल-इंजन” सरकार लाने के लिए हमें एकजुट रहना होगा। भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें 22 राज्यों में हैं, तो पंजाब पीछे क्यों रहे?
सवाल- क्या पार्टी के पुराने नेताओं को लगता है कि उन्हें नजरअंदाज किया गया है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष- मैं साफ कर दूं कि कोई पुरानी भाजपा या नई भाजपा नहीं होती। भाजपा सिर्फ भाजपा है, जो एकजुट है और देश की सबसे बड़ी पार्टी है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी इस बात पर जोर दिया है। हम सभी पार्टी और लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।
असल में, मुझे खुशी है कि कुछ नेताओं ने अपनी शिकायतें ज़ाहिर कीं। हम उनसे संपर्क कर रहे हैं। वे हमारे अपने लोग हैं। पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर नेताओं को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
सवाल- 2020 में अकाली दल के भाजपा से अलग होने के बाद से, राज्य में दोनों ही पार्टियां चुनावी तौर पर सफल नहीं रही हैं। मोदी-बादल की मुलाकात के बाद भाजपा-अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन की अटकलों को आप कैसे देखते हैं?
मैंने पहले भी कहा है कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और किसी भी क्षेत्रीय पार्टी का प्रमुख उनसे मिल सकता है। इस मुलाकात को गठबंधन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हमें सभी 117 सीटों के लिए तैयारी करने के स्पष्ट निर्देश मिले हैं और हम ऐसा कर रहे हैं। पहले हमें मनचाहे चुनावी नतीजे नहीं मिल पाए थे, लेकिन वह तो बस शुरुआत थी।
जब हम (अकाली दल के साथ) गठबंधन में थे, तब हमने सिर्फ 23 विधानसभा और 13 में से तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। अब, हमारी टीमें पंजाब के 90 फीसदी इलाकों में मौजूद हैं, जिनमें गांव और शहर दोनों शामिल हैं, और सभी सीटों पर टिकट के कई दावेदार हैं।
पिछले हफ्ते, मेरे गृह जिले बरनाला में ग्रामीण इलाकों में (भाजपा के लिए) जो उत्साह मैंने देखा, वह जबरदस्त था। लोग अब केंद्र की योजनाओं के बारे में जानते हैं और उनका फायदा उठाना चाहते हैं। वे जानते हैं कि सिर्फ भाजपा की सरकार ही (पंजाब में) उनकी तरक्की में मदद कर सकती है। हम 2027 में अकेले चुनाव लड़ेंगे।
सवाल- विधानसभा चुनावों के लिए आपका रोडमैप क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 14 मार्च को मोगा में हुई ‘बदलाव’ रैली से हमारे अभियान की शुरुआत हुई। हम सितंबर से कई कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें ड्रग्स के खिलाफ एक अहम यात्रा भी शामिल है। अमित शाह, पीएम मोदी और नितिन नवीन जल्द ही राज्य का और दौरा करेंगे।
हम यह पक्का करना चाहते हैं कि एनडीए सरकार की योजनाएँ पंजाब के हर घर तक पहुँचें। अभी आप सरकार के उदासीन रवैये की वजह से ये योजनाएँ लोगों तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
सवाल- क्या SAD के अलग हुए गुट, जैसे ‘वारिस पंजाब दे’ और SAD (पुनर सुरजीत), वोट बाँटकर भाजपा को नुकसान पहुंचाएँगे?
हम वोटरों से कह रहे हैं कि इस बार भाजपा को मौका दें, क्योंकि वे कांग्रेस, आप और अकाली दल को आजमा चुके हैं। मुझे नहीं लगता कि कई पार्टियों या अलग हुए गुटों से कोई फर्क पड़ेगा। एक बार जब लोग मन बना लेंगे, तो वे भाजपा को ही वोट देंगे।
साथ ही, आप को सत्ता-विरोधी लहर (anti-incumbency) का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वह हर मोर्चे पर नाकाम रही है- चाहे वह कानून-व्यवस्था हो या कर्मचारियों और किसानों से किए गए वादे। उसका ड्रग्स-विरोधी कैंपेन भी एक दिखावा है। दूसरी तरफ, कांग्रेस गुटबाजी से निपटने में लगी है।
सवाल- BJP वोटरों से क्या वादा कर रही है?
सत्ता में आने पर, हम सभी कर्मचारियों के लिए केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता (DA) लागू करेंगे और बकाया DA का भी भुगतान करेंगे। यह दुख की बात है कि आप सरकार इतनी बुनियादी माँग भी पूरी नहीं कर पाई है।
हम हरियाणा सरकार की तरह ही किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था करेंगे, जो 24 फसलों पर MSP देती है। असल में, हरियाणा सरकार की सभी योजनाओं और उससे भी अधिक को पंजाब में लागू किया जाएगा। हमारा लक्ष्य पंजाब को निवेश के लिए अनुकूल राज्यों की लिस्ट में टॉप पर लाना भी है, जहाँ यह अभी 22वें स्थान पर है। हम पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह के ‘सरकार-ए-खालसा’ शासन को वापस लाना चाहते हैं, जिसमें आपसी भाईचारे, समानता और मजबूत कानून-व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
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जर्मनी के नागरिक जोड़े ने अपने पिता की यादें और परिवार के कहने पर पंजाब के मोहाली में आकर शादी की। बीते शनिवार, मोहाली के एक गुरुद्वारे में 42 साल के रॉबिन सिंह के साथ जर्मनी की 30 वर्षीय पिया ब्लैंकरमैन ने “लावन फेरे” (श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चक्कर लगाने की शादी की रस्म) लिए। रॉबिन के पिता पंजाबी थे और मां जर्मन हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
