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पंजाब में नशे का काला सच: जेल में हर चार दिन में होती है एक व्यक्ति की मौत

जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एलएस जश्कर इन मौतों के पीछे पुरानी बीमारियों को वजह बताते हैं।

2014 में चार लोगों को पकड़कर अमृतसर जेल में लाया गया था। चारों की अब मौत हो चुकी है। (एक्सप्रेस फोटो)

उड़ता पंजाब नाम की फिल्म पर हो रहे विवाद के बीच पंजाब राज्य के कुछ हैरान कर देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें पता लगा है कि पंजाब का हाल इतना बुरा है कि वहां हर चार दिन में कोई ना कोई शख्स जेल में या फिर पुलिस स्टेशन में मार जाता है। ऐसा वहां पर पिछले दो सालों से हो रहा है। यह आंकड़े RTI से इंडियन एक्सप्रेस ने प्राप्त किए हैं।

आंकड़ों से एक बात और पता लगती है कि सबसे ज्यादा FIR बारा नाम के पिंड से हैं। जालंधर का यह पिंड सबसे ज्यादा बुरी तरह ड्रग्स की चपेट में माना जाता है। यहां से रोजाना लगभग 25 लोगों को ड्रग्स रखने के आरोप में पकड़ लिया जाता है। हालांकि, इन लोगों पर मौजूद ड्रग्स काफी कम मात्रा में होता है।

इतने लोगों को रोज पकड़ने के बावजूद मामलों में कमी इसलिए नहीं आ रही क्योंकि असल में पुलिस ड्रग्स बेचने वालों की जगह पर लेने वालों को पकड़ रही है। पकड़े गए लोगों के घरवालों का भी यही कहना है कि ड्रग्स की लत झेल रहे लोगों के साथ पुलिस गंदा सलूक करती है या फिर उनकी देखरेख ठीक से नहीं कर पाती जिसकी वजह से मौतें होती हैं।

पंजाब में ऐसे कई किस्से हैं जिनमें जेल में लोगों ने आत्महत्या कर ली। ऐसा ही एक किस्सा 45 साल के तरुण कुमार का है। तरुण बारा पिंड का ही रहने वाला था। उसे पुलिस ने 17 अप्रैल 2015 को पकड़ा था। पकड़े जाने के दो महीने बाद ही वह जेल की छत से लटका हुआ मिला। तरुण की पत्नी कहती है कि जेल में नशे से निपटने के लिए उसके पास कोई नहीं था इसलिए उसने आत्महत्या की।

ऐसे में जहां परिवार वाले अपने लोगों के मारे जाने के पीछे जेल प्रशासन की कमी बताते हैं वहीं, जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एलएस जश्कर इन मौतों के पीछे पुरानी बीमारियों को वजह बताते हैं। जश्कर ने कहा, ‘जेल में आने वाले ज्यादातर लोग पहले से किसी ना किसी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है।’

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