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नगद नारायण कथाः क्षेत्रीय दलों को चंदा देने के मामले में पंजाब दूसरे नंबर पर

सबसे ज्यादा नकद चुनावी चंदा क्षेत्रीय दलों को तमिलनाडु और पंजाब सूबों से मिला है। चूंकि पांच सूबों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, उस लिहाज से देखा जाए तो तमिलनाडु के बाद दूसरे क्रम पर पंजाब है जहां क्षेत्रीय दलों 14.11 लाख रुपए नकद चंदे के रूप में मिले हैं जबकि तमिलनाडु से क्षेत्रीय दलों को 245.95 लाख रुपए।

Author नई दिल्ली | January 25, 2017 2:30 AM

सबसे ज्यादा नकद चुनावी चंदा क्षेत्रीय दलों को तमिलनाडु और पंजाब सूबों से मिला है। चूंकि पांच सूबों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, उस लिहाज से देखा जाए तो तमिलनाडु के बाद दूसरे क्रम पर पंजाब है जहां क्षेत्रीय दलों 14.11 लाख रुपए नकद चंदे के रूप में मिले हैं जबकि तमिलनाडु से क्षेत्रीय दलों को 245.95 लाख रुपए।  पांच सूबों में जिन क्षेत्रीय दलों ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 20,000 रुपए से अधिक के नकद का ब्योरा दिया है, उनमें आप, शिरोमणि अकाली दल (शिअद), राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख हैं। बाकी दलों में अन्ना द्रमुक, एआइयूडीएफ, बीजद, द्रमुक, आइयूएमएल, जनता दल (सेकुलर), जद (एकी), झामुमो, लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, नगा पीपुल फ्रंट, पीएमके, राजद, रालोद, शिअद, शिवसेना, एसडीएफ, टीआरएस, तेदपा, वाइएसआर कांग्रेस।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वाच (एनइडब्लू) की जारी रिपोर्ट के अनुसार 20000 रुपए से अधिक की दानराशि के रूप में 2015-16 के वित्तीय वर्ष में 2249 स्रोतों से 107.62 करोड़ रुपए की चंदे की रकम क्षेत्रीय दलों को मिली। दिल्ली से क्षेत्रीय दल को 6.19 लाख रुपए चंदा मिला। अन्य राज्यों से 10.03 लाख रुपए, मलेशिया से एक लाख रुपए का चंदा आया। 46.74 लाख रुपए अपूर्ण/अघोषित चंदे के हैं।  एडीआर के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 में कुल मिलाकर 21 क्षेत्रीय दलों को मिले दान पर विचार किया गया। अगर वित्त वर्ष 2014-15 से इसकी तुलना की जाए 20.20 फीसद यी 27.24 करोड़ रुपए की गिरावट आई। 2014-15 में क्षेत्रीय दलों को 13.86 करोड़ रुपए दान में मिले थे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों उतरी पार्टियों और हिन्दी क्षेत्र के दलों के हिसाब से गौर करें तो आप के चंदे में छह गुना कमी आई है।

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