Punjab Politics: पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, जो कि कांग्रेस पार्टी के लिए काफी ज्यादा अहम हैं। हालांकि, पिछले कई हफ्ते कांग्रेस के लिए आंतरिक कलह के चलते उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। राज्य कांग्रेस के चुनाव प्रभारी और एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल की तुलना एक ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारी से की जा रही है।

दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को बीजेपी-RSS एजेंट कहा जा रहा है। यह संघर्ष पार्टी के लिए बेहद ही असंतोषजनक रहा है। अंतत: अब इन आंतरिक मामलों को सुलझाने के लिए सबकुछ कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी पर निर्भर हो गया है, क्योंकि अगले महीने ही राहुल गांधी राज्य में चुनाव से पहले राज्यव्यापी बस यात्रा करने वाले हैं।

कांग्रेस नेताओं में अभी भी संशय

हालांकि, पार्टी में कुछ लोग अभी भी संशय में हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “हम एक पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप की तरह हैं जहां सभी ने एक-दूसरे को म्यूट कर रखा है। अब किसी ने यह अजीबोगरीब विचार रखा है कि सभी को एक बस में बिठाकर पूरे राज्य में घुमाया जाए। मुझे नहीं पता कि इससे अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने का मूल मुद्दा कैसे हल होगा।”

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने नई दिल्ली में राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी को पंजाब में पार्टी की समस्याओं के बारे में बताया। इसके साथ ही राज्य में चुनाव से पहले बस यात्रा का भी प्रस्ताव दिया। बघेल के दौरे हाल के दिनों में पंजाब में बढ़ें हैं, जो ये बताते हैं कि चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच टकराव और गुटबाजी ज्यादा हो गई है।

‘होने वाली है बड़ी यात्रा’

भूपेश बघेल ने बैठक के बारे में पत्रकारों से कहा, “मैंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों से मुलाकात की। मुख्य विषय पंजाब की बस यात्रा थी। मैं इस यात्रा के लिए अनुमति लेना चाहता था, विशेष रूप से राहुल गांधी की यात्रा के संबंध में। उन्होंने मुझे समय दिया और सप्ताह भर के कार्यक्रम का विवरण देते हुए एक प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा, जिसके बाद वे समय तय करेंगे… यह एक बड़ी यात्रा होने वाली है। चूंकि यह पूरे पंजाब को कवर करेगी, इसलिए इसमें कुछ समय लगेगा।”

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अस्थायी योजनाओं के मुताबिक, विपक्ष के नेता सबसे पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकेंगे और फिर उस रेलगाड़ी में सवार होंगे, जिसे पार्टी के आशावादी एकता एक्सप्रेस कह रहे हैं। पता चला है कि यात्रा कार्यक्रम पहले चरण में अमृतसर से हुसैनीवाला की ओर 135 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।

चरणजीत सिंह चन्नी के एक समर्थक ने व्यंग्य करते हुए कहा, “इसे एक रोड ट्रिप की तरह समझिए, जहां मुख्य आकर्षण प्राकृतिक दृश्य नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी और राज्य प्रमुख राजा वारिंग को एक ही बस में यात्रा करते हुए देखना है, और वह भी बिना वारिंग की सीट पर दावा किए।”

सारे नेताओं को एक साथ लाने की कोशिश

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बस यात्रा में राज्य के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, चन्नी और वड़िंग सहित सभी वरिष्ठ राज्य नेता भाग लेने वाले हैं। एक सुनियोजित प्रदर्शन होगा जिसका उद्देश्य मतदाताओं और शायद पार्टी कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं को यह विश्वास दिलाना है कि गहरे रूप से विभाजित राज्य इकाई ने मतभेदों को पीछे छोड़ दिया है।

2027 के चुनाव नजदीक आने और पंजाब कांग्रेस के हाल के महीनों में आपस में ही झगड़ने के साथ यह धारणा बन गई थी कि पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है, जो खुद भी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही है।

राहुल गांधी द्वारा राज्य कांग्रेस नेताओं को टीम के रूप में काम करने या बेंच पर बैठने के जोखिम के बारे में दी गई पिछली चेतावनियां अनसुनी कर दी गई प्रतीत होती हैं। फिलहाल, सारी उम्मीदें बस यात्रा और विपक्ष के नेता द्वारा चुनाव से पहले आपस में लड़ रहे नेताओं को एकजुट करने की क्षमता पर टिकी हैं।

यह भी पढ़ें: अमरिंदर सिंह को हटाने के लिए दिल्ली में डट गई थीं भट्ठल… पढ़िए, पंजाब के दो दिग्गज नेताओं की सियासी अदावत की कहानी | Explained

पंजाब में दो ऐसे दिग्गज हुए हैं जिन्होंने राज्य की राजनीति में बड़ा नाम कमाया, दोनों ही नेता मुख्यमंत्री रहे और दोनों के बीच सियासी दुश्मनी भी खूब हुई। इन नेताओं के नाम कैप्टन अमरिंदर सिंह और राजिंदर कौर भट्ठल हैं। पढ़िए पूरी खबर…