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454 गांवों में स्कूल बंद, ग्रामीणों का पलायन शुरू

पंजाब सरकार की ओर राज्यभर में भारत-पाक सीमा के दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में स्कूलों को बंद करने और इन गांवों को खाली करवाने के निर्देशों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

Author लुधियाना | September 30, 2016 2:41 AM
(File Photo)

पंजाब सरकार की ओर राज्यभर में भारत-पाक सीमा के दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में स्कूलों को बंद करने और इन गांवों को खाली करवाने के निर्देशों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। फिरोजपुर जिले में आने वाले कुल 900 गांवों में दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले 150 गांव हैं, वहीं फाजिल्का के 376 गांवों में 150, जहां सरकार के निर्देश जारी होते ही फिरोजपुर और फाजिल्का के कुछ गांवों के लोगों ने पलायन शुरू कर दिया वहीं बहुत से ग्रामीण, सरकार के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं।ग्रामीणों की मानें तो इस घटना से 1965, 1971 और फिर 1999 के करगिल युद्ध की यादें ताजा हो गर्इं हैं, जब उन्हें इसी तरह अपने गांव और घर छोड़कर जाना पड़ा था। फाजिल्का जिले के गांव बेरीवाला के लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हर गांव में कुछ लोग 1971 और 1965 के युद्ध के दौरान रुक गए थे, हालांकि सरकार ने तब भी गांव खाली करने के निर्देश जारी किए थे। ग्रामीणों का कहना था कि वे अपने सामान का ध्यान रखने के लिए रुके थे। ऐसे में अब भी वे यहां से जाने से तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा ‘हम नहीं चाहते कि युद्ध हो, क्योंकि उसमें हमारा बहुत नुकसान होता है लेकिन ऐसा होता है तब भी हम नतीजे भुगतने को तैयार हैं।’


फिरोजपुर से भाजपा नेता सुखपाल सिंह नन्नू ने कहा ‘मुझे अभी भी कारगिल युद्ध का समय याद है। उस समय हुसैनीवाला क्षेत्र के ज्यादातर ग्रामीण गांवों में ही रुके रहे थे। यही नहीं उन्होंने लगातार सेना के जवानों के लिए लंगर का भी इंतजाम किया था। इसीलिए अभी भी ग्रामीण बहादुरी से रहेंगे। हां उन्हें थोड़ा ध्यान जरूर रखना चाहिए।’
फिरोजपुर के पाकिस्तान से सटे आखिरी गांव टिंडीवाला के ग्रामीणों ने सरकार के निर्देश जारी होते ही अपने सोना, नकदी और कपड़े इकट्ठा करना शुरू कर दिया ताकि वे यहां से निकल सकें। कुछ लोगों ने तो ट्रकों में अपना फर्नीचर भी लाद लिया। इसी तरह बारेके गांव में लोगों ने महिलाओं और बच्चों को एक ट्रक में बैठाकर शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों के पास भेज दिया, जबकि पुरुष गांव में ही रहकर सामान की रखवाली करेंगे। फिरोजपुर शहर में एक निजी कंपनी में काम करने वाले गांव के निवासी संदीप कुमार ने कहा ‘टीवी पर इस तरह की खबरें देख कर एकदम दहशत सी हो गई है। मैंने तुरंत अपने घर पर फोन लगाया तो मेरे पिता ने बताया कि सीमा के साथ सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं फिर भी बहुत से लोग अभी भी गांवों में रह रहे हैं।’

संदीप ने बताया कि वह अपना कार्यालय का काम पूरा कर गांव वापस चला जाएगा। इसी तरह गांव गट्टी राजोके से भी महिलाओं और बच्चों को तुरंत शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों के पास भेज दिया गया है। कुछ लोग तो मोटर साइकिलों पर बैठकर ही अपने रिश्तेदारों के घरों में चले गए हैं। उनका कहना है कि हालात ठीक होते ही वह घर लौट जाएंगे।
फाजिल्का के उपायुक्त ईशा कालिया ने कहा कि ‘हम लोग दस किलोमीटर के दायरे के बाहर बेस कैंप स्थापित करेंगे, जो लोग भी इन शिविरों में आएंगे उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। फिलहाल तो लोग अपने रिश्तेदारों के घरों में जा रहे हैं। अभी तनाव वाली कोई बात नहीं है।’ उन्होंने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो फाजिल्का में विभिन्न जगहों पर 26 राहत शिविर लगाए जाएंगे।

फिरोजपुर के उपायुक्त डीपीएस खरबंदा ने कहा कि ग्रामीणों के लिए गांव छोड़कर जाना जरूरी नहीं किया गया है, जो जाना चाहता है वह जा सकता है। हम उनका पूरा ध्यान रखेंगे। हमने ग्रामीणों को बता दिया है कि हमारे सुरक्षा कर्मचारी हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहेंगे।

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