Punjab News: पंजाब के फरीदकोट जिले में पुलिस ने नहर का पानी चोरी करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 43 किसानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। अब इस मामले में सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि इस लिस्ट में कई ऐसे किसानों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी मौत सालों पहले हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, 10 जुलाई को नहर चोरी के मामले में कुल 43 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें हरपाल सिंह और बलदेव सिंह का नाम भी है। अहम बात यह है कि हरपाल सिंह का 2017 में 65 साल की उम्र में निधन हो गया था, जबकि बलदेव का 83 साल की उम्र में 2021 में निधन हुआ था।
पुलिस की जांच पर विवाद और सफाई
केवल हरपाल और बलदेव नहीं बल्कि FIR में कई ऐसे नाम भी दर्ज हैं, जो कि 22 साल पहले दुनिया छोड़ चुके हैं। इस केस ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। किसान पुलिस की जांच और काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस ने इसे लिपिकीय त्रुटि बताया है।
हरीके कैनाल डिवीज़न के कार्यकारी अभियंता की शिकायत पर दर्ज की गई इस एफआईआर में सुखनवाला और किला नौ गांवों के 43 किसानों पर अनधिकृत चैनलों के माध्यम से कुछ खेतों में पानी का प्रवाह बढ़ाने के लिए मुदकी डिस्ट्रीब्यूटरी (रजवाहे) के तीन आउटलेट को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस एफआईआर में नहर के पानी की चोरी, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान निवारण अधिनियम से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
केस में मृत पिता का नाम
इस मामले में 47 वर्षीय हरनेक सिंह के लिए यह मामला तब व्यक्तिगत बन गया जब उन्हें पता चला कि उनके दिवंगत पिता हरपाल सिंह का नाम आरोपियों में शामिल हैं। हरनेक ने कहा, “मेरे पिता की मृत्यु 2017 में हुई थी। इसके तुरंत बाद हमने राजस्व विभाग में मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कर दिया था क्योंकि जमीन मेरे नाम पर ट्रांसफर होनी थी। अब मैं लगभग नौ एकड़ जमीन पर खेती करता हूं। हमने कभी नहर का पानी नहीं चुराया।” उन्होंने सवाल उठाया कि अधिकारी उन रिकॉर्ड्स को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं, जो उनके पिता की मृत्यु के बाद पहले ही अपडेट किए जा चुके थे।
उन्होंने आगे कहा, “एफआईआर में उल्लेख है कि कुछ खेतों में पानी की आपूर्ति करने वाले मुदकी रजवाहे का आउटलेट क्षतिग्रस्त हो गया था। हमने डिप्टी कमिश्नर (DC), एसएसपी फरीदकोट और नहर विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की है। हम चाहते हैं कि इस एफआईआर को रद्द किया जाए, नहीं तो हम हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने मुझे और मेरे पिता को बदनाम किया है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।”
22 साल पहले जिसका निधन, FIR में उसका भी नाम
कुछ ऐसा ही करीब 15 एकड़ जमीन पर खेती करने वाले 66 वर्षीय बहादुर सिंह ने कहा कि वह यह जानकर स्तब्ध रह गए कि उन्हें और उनके दिवंगत पिता बलदेव सिंह को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों की सूची में करनैल सिंह भी शामिल हैं, जिनकी 22 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। उनके पोते सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि परिवार ने सालों पहले जमीन लीज (ठेके) पर दे दी थी और वे अब खुद खेती नहीं करते हैं। उन्होंने कहा, “ग्रामीण इस मुद्दे को सामूहिक रूप से उठा रहे हैं। हम खुद खेती भी नहीं करते हैं और जमीन पट्टे पर दे रखी है। हम सब इस बात से बेहद हैरान और स्तब्ध हैं।”
स्थानीय निवासियों ने सुखनवाला के एक अन्य हरपाल सिंह की ओर भी इशारा किया, जिनकी करीब 15 साल पहले मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनका नाम भी केस में दर्ज है। इस एफआईआर में सुखनवाला के 19 और किला नौ के 24 किसानों के नाम शामिल हैं। किला नौ गांव के निवासी लखबीर सिंह ने कहा, “मैंने 3-4 साल पहले अपनी जमीन बेच दी थी, फिर भी एफआईआर में मेरा नाम डाल दिया गया है। उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का नाम भी शामिल किया है जो कनाडा में रहता था और अब जीवित नहीं है। उसकी मृत्यु के बाद जमीन उसकी दो बेटियों के नाम ट्रांसफर हो गई थी और वे भी कनाडा में ही रहती हैं।” एक सरकारी स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर का नाम भी एफआईआर में है। उन्होंने कहा, “मैंने किला नौ में अपनी जमीन लीज पर दे रखी है और मैं शायद ही कभी गांव जाता हूं।”
पुलिस ने जारी किया बयान
इसको लेकर जब विवाद बढ़ने लगा तो फरीदकोट के एसएसपी गुरदीप सिंह बैंस ने मामले में गड़बड़ियों की बात स्वीकार की। एसएसपी बैंस ने कहा, “नहर विभाग के कार्यकारी अभियंता ने गांवों में कथित पानी चोरी की जांच की थी और अपनी रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी। उस रिपोर्ट के आधार पर हमें किसानों की एक सूची मिली, जिसके बाद सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।”
उन्होंने आगे कहा, “अब हमें पता चला है कि इसमें कुछ लिपिकीय त्रुटि हुई है, क्योंकि एफआईआर में कई नाम उन लोगों के हैं, जिनकी सालों पहले मृत्यु हो चुकी है। हम रिकॉर्ड का सत्यापन करेंगे और जांच करेंगे। तब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।” एसएसपी ने कहा कि इसका एक संभावित कारण यह हो सकता है कि राजस्व रिकॉर्ड में अक्सर मृत्यु के लंबे समय बाद भी पिछले भूस्वामियों के नाम ही चलते रहते हैं।
उन्होंने कहा, “हमें यह सत्यापित करने की आवश्यकता है कि मृत व्यक्तियों के मामले में जमीन ट्रांसफर हुई थी या नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो वास्तव में नहर के आउटलेट को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार थे, न कि उन सभी किसानों के खिलाफ जिनके खेतों में उन आउटलेट से पानी गया था।
किसान संगठनों ने की मांग
हालांकि, किसान संगठनों ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया है और एफआईआर को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की है। कीर्ति किसान यूनियन के महासचिव राजिंदर सिंह दीप सिंह वाला ने दावा किया कि दोनों गांवों के करीब 10 मृत किसानों को नामजद किया गया है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि एफआईआर रद्द की जाए। इसके अलावा, अधिकारियों को किसानों से माफी मांगनी चाहिए।”
मुदकी डिस्ट्रीब्यूटरी, दोनों गांवों के 100 से अधिक खेतों की सिंचाई करती है। किसानों का कहना है कि इससे एक और सवाल उठता है कि यदि कथित छेड़छाड़ से एक साझा सिंचाई चैनल प्रभावित हुआ था, तो केवल 43 लोगों को ही क्यों निशाना बनाया गया? हरनेक सिंह ने कहा, “आरोप झूठे हैं। हमने कभी आउटलेट को नुकसान नहीं पहुंचाया। इस रजवाहे से किसानों को बारी-बारी से पानी दिया जाता है और क्षतिग्रस्त आउटलेट केवल एक गांव के खेतों में पानी की आपूर्ति करते हैं। हमें नहीं पता कि केवल दो गांवों के 43 लोगों को ही क्यों नामजद किया गया है। एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।”
निष्पक्ष जांच का मिला आश्वासन
बीकेयू सिद्धूपुर के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भी किसानों का समर्थन करते हुए कहा, “सबसे पहली बात तो यह एफआईआर ही झूठी है और दूसरी बात, इसमें मृत व्यक्तियों को नामजद किया गया है।” किसानों ने मंगलवार को डीसी राहुल चाबा से मुलाकात की और कहा कि उन्होंने उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
यह विवाद अब राजनीतिक तौर पर भी गरमा गया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने ‘आप’ सरकार पर बिना उचित सत्यापन के मामले दर्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर में नामजद कई लोगों की सालों पहले मृत्यु हो चुकी थी, जबकि अन्य विदेश में रह रहे थे या अपनी जमीन बेच चुके थे। उन्होंने इसे बदले की राजनीति का सबूत बताते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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