दो महीने पहले अमृतसर पूर्व की पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू को दिसंबर में कांग्रेस से सस्पेंड किया गया था। इसके बाद उन्होंने 31 जनवरी को पार्टी छोड़ दी। हालांकि शुक्रवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव भूपेश बघेल ने घोषणा करते हुए कहा कि नवजोत कौर को पार्टी से निकाल दिया गया है। हालांकि उनके पति और क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी कांग्रेस में हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने भूपेश बघेल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहा।

नवजोत कौर ने लगाया था आरोप

नवजोत कौर ने दिसंबर में राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया था जब उन्होंने आरोप लगाया था कि जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है वह कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा बन जाता है। उन्होंने कहा था कि उनके पति तभी सक्रिय राजनीति में लौटेंगे जब उन्हें मुख्यमंत्री का पद दिया जाएगा। नवजोत कौर सिद्धू ने उस समय कहा था, “कांग्रेस में इतनी अंदरूनी कलह है, मुझे नहीं लगता कि वे नवजोत सिद्धू को आगे बढ़ने देंगे क्योंकि पहले से ही पांच मुख्यमंत्री चेहरे हैं, और वे कांग्रेस को हराने पर तुले हुए हैं। अगर वे (हाई कमान) यह समझते हैं, तो यह अलग बात है।”

क्या बीजेपी में लौटेगा सिद्धू परिवार?

सिद्धू दंपति पिछले कुछ महीनों से मौजूदा पंजाब कांग्रेस नेतृत्व, खासकर प्रदेश पार्टी प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की खुले तौर पर आलोचना कर रहे हैं। जनवरी में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नवजोत कौर ने अमरिंदर सिंह वारिंग पर कथित भ्रष्टाचार और अंदरूनी साजिश का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। इससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि सिद्धू दंपति बीजेपी में लौट सकते हैं। सिद्धू दंपति ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी से की थी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सिद्धू दंपति पार्टी के अंदरूनी संघर्ष में फंसे हैं।

2012 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले नवजोत कौर बीजेपी में शामिल हुई थीं और अपने पहले ही चुनाव में अमृतसर पूर्व सीट जीती थी। राजनीतिक रूप से नई होने के बावजूद उन्हें शिरोमणि अकाली दल (SAD)-बीजेपी सरकार में मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था। तब तक उनके पति अमृतसर से बीजेपी कैंडिडेट के तौर पर तीन लोकसभा चुनाव जीत चुके थे।

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नवजोत कौर ने बीजेपी क्यों छोड़ी?

लेकिन कुछ ही समय बाद नवजोत कौर ने अपने ही NDA सरकार पर अपने चुनाव क्षेत्र के विकास के लिए ‘फंड के गलत बंटवारे’ को लेकर आरोप लगाना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और ड्रग्स की समस्या को रोकने में नाकाम रहने के लिए उसकी आलोचना की। 2014 में वह पंजाब बीजेपी के एक ऐसे गुट का चेहरा बन गईं जो SAD से संबंध तोड़ना चाहता था। उन्होंने राज्य बीजेपी नेतृत्व की भी आलोचना की। उसी साल नवजोत सिंह सिद्धू का अमृतसर लोकसभा से टिकट काट दिया गया और अरुण जेटली को उम्मीदवार बनाया गया।

दिसंबर 2015 में नवजोत कौर ने अपने पति को पार्टी में शामिल करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के कथित प्रस्तावों का स्वागत किया था। लेकिन महीनों बाद अप्रैल 2016 में बीजेपी ने नवजोत सिंह को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट करके दंपति को मनाने की कोशिश की। इसके बाद नवजोत कौर ने दावा किया कि उनके पति ने AAP में शामिल होने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि पार्टी ने उनके द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया।

2017 के विधानसभा चुनावों से पहले नवजोत कौर ने कहा कि वह और सिद्धू SAD के साथ लगातार गठबंधन के कारण पंजाब में बीजेपी के लिए प्रचार नहीं करेंगे। जुलाई 2016 में नवजोत कौर ने ही सबसे पहले यह खबर दी थी कि नवजोत सिंह बीजेपी छोड़ देंगे और राज्यसभा से इस्तीफा दे देंगे। उसी साल अगस्त में उन्होंने कहा कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू के लिए सभी विकल्प खुले हैं। तब अटकलें लगाई गई कि वह कांग्रेस या AAP में शामिल हो सकते हैं। लेकिन उस समय उन्होंने 2017 के चुनावों के लिए पार्टी के सीएम चेहरे के रूप में कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस के चुनाव पर खुले तौर पर सवाल उठाया था।

अमरिंदर से सिद्धू का विवाद

हालांकि अमरिंदर सिंह सिद्दू दंपति को कांग्रेस में शामिल होते हुए देखने के इच्छुक नहीं थे। यहां तक कि अगस्त 2016 में एक बयान भी जारी किया था कि नवजोत कौर को दूसरे दलों के मामलों में दखल देने के बजाय अपने काम से काम रखना चाहिए लेकिन यह जोड़ा आखिरकार चुनावों से सिर्फ एक महीने पहले कांग्रेस में शामिल हो गया। चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद नवजोत सिंह को सीएम अमरिंदर सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। लेकिन दोनों के बीच टकराव शुरू हो गया। नवजोत सिंह ने 2015 के गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले को संभालने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना की। 2019 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।

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लेकिन कांग्रेस में अमरिंदर के खिलाफ बढ़ते असंतोष के बीच नवजोत सिंह को 2021 में पंजाब कांग्रेस प्रमुख नियुक्त किया गया। इसके बाद अमरिंदर सिंह को सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाद में उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के लिए खुले तौर पर नवजोत सिंह को दोषी ठहराया।

कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया, जिन्हें 2022 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी का सीएम चेहरा बनाए रखा गया। इससे भी सिद्धू दंपति खुश नहीं था और नवजोत कौर ने आलोचना की। नवजोत कौर ने दावा किया कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू बेहतर सीएम उम्मीदवार थे। हालांकि विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से हार गए। नवजोत कौर का कांग्रेस लीडरशिप, खासकर राहुल गांधी के खिलाफ ताजा हमला यह इशारा करता है कि नवजोत सिंह भी कांग्रेस के बाहर अपने ऑप्शन तलाशने लगे हैं। पढ़ें नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी कांग्रेस से निलंबित