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कांग्रेसी सीएम के खिलाफ पुराने सांसद दोस्त ने ही खोला मोर्चा तो हटा लिया सुरक्षा घेरा, अमित शाह का मंत्रालय दे रहा सुरक्षा कवच

पुलिस सुरक्षा वापस लेने का फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल में बाजवा और एक अन्य कांग्रेसी राज्यसभा सांसद शमशेर सिंह ने राज्य में जहरीली शराब पीने से 110 लोगों की मौत पर सीएम पर निशाना साधा।

Author Translated By Ikram चंडीगढ़ | Updated: August 9, 2020 10:34 AM
punjab governmentपंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ कथित तौर पर विद्रोह करने के कुछ दिनों बाद शनिवार को राज्य सरकार ने सीएम के पुराने दोस्त रहे और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा की पुलिस सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया। अपने निर्णय में राज्य सरकार ने कहा कि वास्तव में अब उन्हें कोई खतरा नहीं है और कांग्रेस नेता को गृह मंत्रालय से सीधे केंद्रीय सुरक्षा मिल रही थी।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक बाजवा की सुरक्षा में वर्तमान में पंजाब पुलिस के छह जवान तैनात हैं और एक एस्कॉर्ट के साथ एक ड्राइवर है। सीआईएसएफ के अलावा 23 मार्च तक राज्यसभा सांसद की सुरक्षा में पंजाब पुलिस के 14 कर्मचारी थे। इस बीच कोविड-19 महामारी में जरुरत के चलते कुछ कर्मचारी को वापस बुला लिया गया था।

पुलिस सुरक्षा वापस लेने का फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल में बाजवा और एक अन्य कांग्रेसी राज्यसभा सांसद शमशेर सिंह ने राज्य में जहरीली शराब पीने से 110 लोगों की मौत पर सीएम पर निशाना साधा। बाद में कैप्टन अमरिंदर के समर्थन में आए पार्टी चीफ सुनील जाखड़ की भी आलोचना की गई।

बाद में बाजवा ने पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री सिंह और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ को तत्काल हटाने की मांग की थी। बाजवा ने कहा था कि यदि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को नहीं हटाया जाता है तो पंजाब में पार्टी का नाश हो जाएगा।

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इसके बाद एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब सरकार ने कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा की राज्य पुलिस सुरक्षा हटाने का निर्णय लिया है। हमारी समीक्षा में पाया गया कि उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है और अब उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई केंद्रीय सुरक्षा दी जाएगी। प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा प्राप्त करने के बाद बाजवा को दी गई राज्य पुलिस सुरक्षा का कोई अर्थ नहीं था।

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