पंजाब कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी ने कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब सबकी नजर राहुल गांधी पर है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही ऐसा फैसला ले सकते हैं, जिससे पंजाब इकाई में बढ़ते विवाद को रोका जा सके और चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट किया जा सके।
विदेश दौरे से लौटने के बाद राहुल गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। बैठक में पंजाब कांग्रेस के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को भी दिल्ली बुलाया गया है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में पंजाब के कई नेताओं से मुलाकात कर पूरी स्थिति का आकलन किया है और अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंप दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब कांग्रेस में सबसे बड़ा विवाद प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा खुलकर वड़िंग के खिलाफ हैं। दोनों नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे मौजूदा नेतृत्व में काम करने के पक्ष में नहीं हैं।
दरअसल, जुलाई में कांग्रेस हाईकमान ने फैसला किया था कि राजा वड़िंग प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे सभी गुट साथ आ जाएंगे, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ। इसके बाद विरोध और तेज हो गया।
पार्टी के भीतर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि राजा वड़िंग और उनकी पत्नी अमृता वड़िंग पूरे पंजाब पर ध्यान देने के बजाय अपने-अपने संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इससे कई नेताओं में नाराजगी बढ़ी है।
भूपेश बघेल ने विवाद को कम करके दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस का सिर्फ एक चेहरा है और वह राहुल गांधी हैं। उनके इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि कांग्रेस फिलहाल मुख्यमंत्री पद का कोई अलग चेहरा घोषित नहीं करना चाहती।
हालांकि, बघेल दोनों गुटों के बीच समझौता कराने में सफल नहीं हो सके। असंतुष्ट नेताओं ने उनसे साफ कहा कि वे राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए बिना पीछे नहीं हटेंगे। बघेल ने जवाब दिया कि नेतृत्व बदलना कोई बच्चों का खेल नहीं है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का फैसला इतनी आसानी से नहीं बदला जा सकता।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी पंजाब के नेताओं की राय सुनने के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में चल रही बगावत को जल्द खत्म किया जाए। कांग्रेस नेतृत्व को भी चिंता है कि यदि गुटबाजी जारी रही तो 2027 के चुनाव में इसका सीधा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं। इस बार पार्टी सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अंदरूनी मतभेद जल्द खत्म नहीं हुए, तो राहुल गांधी की लोकप्रियता भी पार्टी को उतना फायदा नहीं दिला पाएगी, जितनी उसे उम्मीद है। ऐसे में अब पंजाब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यही फैसला तय करेगा कि कांग्रेस 2027 की चुनावी लड़ाई मजबूती से लड़ पाएगी या फिर गुटबाजी उसकी राह मुश्किल बना देगी।
यह भी पढ़ें: भूपेश बघेल की एंट्री से सुलझा या और उलझा पंजाब कांग्रेस का विवाद? चन्नी गुट पर राजा वडिंग का तीखा पलटवार
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के मध्यस्थता के बाद भी पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच मतभेद और भी बढ़ते दिख रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत है जो मजबूती से बात रख सकें, न की किसी समझौता करने वाले नेता की। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
