पंजाब बीजेपी के सीनियर नेता इकबाल सिंह लालपुरा ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से कहा है कि उन्हें अपनी हद में रहना चाहिए। लालपुरा ने यह बयान रवनीत सिंह बिट्टू के द्वारा सतलुज फिल्म में किए गए दावों पर सवाल उठाने को लेकर दिया है।

पिछले कुछ दिनों में रवनीत सिंह बिट्टू ने लगातार सतलुज फिल्म में किए गए उस दावे पर सवाल उठाया है जिसमें कहा गया है कि पंजाब जब आतंकवाद का सामना कर रहा था तब राज्य में 25,000 अज्ञात शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

क्या कहा था बिट्टू ने?

केंद्रीय मंत्री बिट्टू का कहना है कि अगर 25,000 वाला आंकड़ा सही है तो इसकी लिस्ट सामने लाई जाए। बिट्टू ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा था कि अगर 5000 शवों का भी आंकड़ा है तो उसे मीडिया, संबंधित आयोग या सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सामने रखा जाए।

मानवाधिकार आयोग से आंकड़े ले सकते हैं बिट्टू

बिट्टू के सवाल को लेकर इकबाल सिंह लालपुरा ने नाराजगी जताई है। लालपुरा ने कहा, “हर किसी को अपनी सीमा में रहना चाहिए, जब जसवंत सिंह खालड़ा ने 25,000 लोगों के लापता होने की बात कही तो उन्होंने इसे लेकर जानकारी भी दी थी। उनके दावे का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी समर्थन किया था। अगर बिट्टू साहब को आंकड़े चाहिए तो वह इसे मानवाधिकार आयोग से ले सकते हैं।”

लालपुरा आईपीएस अफसर रहे हैं और वह उन तीन पुलिस अफसरों में से एक हैं जिन्होंने खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरेवाला को गिरफ्तार किया था। इकबाल सिंह लालपुरा के बयान से यह जरूर पता चलता है कि सतलुज फिल्म को लेकर पंजाब बीजेपी के नेता एक राय नहीं है।

बहस का मुद्दा बनी सतलुज

सतलुज फिल्म को लेकर पूरे पंजाब में अच्छी-खासी बहस चल रही है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन के संघर्ष पर आधारित है। 3 जुलाई को सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया लेकिन 2 दिन के भीतर ही हटा लिया गया।

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सतलुज फिल्म को इन दिनों शिरोमणि अकाली दल, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पंजाब के कई गांवों में दिखाया जा रहा है। फिल्म को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।