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पंजाब: भारतीय विज्ञान कांग्रेस में DRDO ने दिखाया मिनी-यूजीवी रोबोट, खुद ढूंढ सकता है बम

जालंधर में 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस की शुरुआत हुई है। इसकी शुरुआत के पहले दिन बेंगलुरू के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (केयर) ने मिनी-यूजीवी रोबोट को लोगों के सामने पेश किया।

Author January 4, 2019 11:19 AM
इंडियन साइंस कांग्रेस (file photo) फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

पंजाब के जालंधर में 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस की शुरुआत हुई है। इसकी शुरुआत के पहले दिन बेंगलुरू के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (केयर) ने मिनी-यूजीवी रोबोट को लोगों के सामने पेश किया। इस रोबोट की खासियत यह है कि ये यह खतरे वाले स्थानों पर जाकर बम या संदिग्ध सामान को तलाशेगा साथ ही इसे रिमोट से ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होगी। यह दूसरे रोबोट के साथ भी खुद ही को-ऑर्डिनेट कर सकता है।

जालंधर में चल रही इंडियन साइंस कांग्रेस में मिनी-यूजीवी नामक रोबोट निर्माता ने बताया कि कैमरा, सेंसर, राडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इस खास रोबोट को तैयार किया गया है। यह रिमोट कंट्रोल से संचालित होने वाला रोबोट है। यह रोबोट विस्फोटक पर पानी छिड़क सकता है साथ ही दो किलो से ज्यादा तक के वजन वाले संदिग्ध सामान को उठाकर भी ला सकता है। इस रोबोट के बारे में डीआरडीओ के चेयरमैन सतीश रेड्डी का कहना है कि मिनी-यूजीवी का परीक्षण सफल रहा है और सुरक्षा एजेंसियों की जरूरत के मुताबिक इसके ऑर्डर तैयार किए जाएंगे।

बता दें कि पांच दिन तक चलने वाली इस साइंस कांग्रेस में लगभग 100 से अधिक साइंटीफिक एवं टेक्लोलॉजी पर आधारित कार्यक्रम होंगे। डीआरडीओ, इसरो, डीएसटी, एम्स, यूजीसी, एआइसीटीई एवं अमेरिका, ब्रिटेन, भारत व अन्य देशों के कई प्रमुख यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक इसमें हिस्सा लेंगे। इस बार की इंडियन साइंस कांग्रेस में डीआरडीओ ने चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लैब में विकसित की गई प्लास्टिक बुलेट भी पेश की। प्लास्टिक बुलेट की खासियत यह है कि ये आम बुलेट से 10 गुना कम वजनी है। इसे एके-47 राइफल से फायर कर 10-12 मिमी तक की गहराई का घाव किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल ने डीबीआरएल से ऐसी 50 हजार बुलेट उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

इंडियन साइंस कांग्रेस हर साल आयोजित होती है। जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री करते हैं। इसमें प्रसिद्ध वैज्ञानिक, यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर, चिल्ड्रन साइंटिस्ट हिस्सा लेते हैं। इसके लिए जिला व प्रदेश स्तर पर साइंस कंपटीशन से निकलकर राष्ट्रीय साइंस कांग्रेस के लिए प्रतिभागियों का चयन किया जाता है।

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