पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने कहा है कि हाई कोर्ट कानून के शासन और संविधान के प्रति अपनी शपथ के अनुसार काम करेगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगी।

जस्टिस मिश्रा ने यह टिप्पणी उस मामले में की जिसमें अधिकारियों के खिलाफ जानबूझकर अवमानना और हाई कोर्ट के द्वारा तीन अगस्त को दिए आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई की मांग की गई थी।

तीन अगस्त के आदेश में अदालत ने पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (DA/DR) की किस्तें और बकाया राशि जारी करने का निर्देश दिया था।

चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा, “यह अदालत कानून के शासन के अनुसार चलेगी और किसी भी तरह की चाल से दबाव में नहीं आएगी… इसलिए हम पूरी तरह कानून के अनुसार चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है और हम जानते हैं कि अपनी शपथ को कैसे बनाए रखना है और उसकी रक्षा कैसे करनी है।”

चीफ जस्टिस मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि अदालत किसी भी पक्ष की दलीलों से प्रभावित नहीं होगी।

जस्टिस मिश्रा ने कहा, “दोनों पक्ष इस मामले में टिप्पणी न करें! आपके पास कहने या करने के लिए बहुत कुछ हो सकता है लेकिन हम कानून के अनुसार चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है।” बेंच पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा निर्मल सिंह धनोआ और अन्य के खिलाफ दायर कानूनी याचिका (एलपीए) पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं ने उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की है जो तीन अगस्त के आदेश को विवादित बनाने और उसका राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ऐसा करके हाई कोर्ट के अधिकार को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

निर्देश के बावजूद सरकार ने जारी किया विज्ञापन

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि पंजाब सरकार DA/DR और बकाया राशि जारी करने के मामले में अदालत के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है। यह भी कहा कि अदालत द्वारा DA/DR का बकाया चुकाए जाने तक बड़े पैमाने पर प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापन में होने वाले खर्च से बचने के निर्देश के बावजूद, राज्य सरकार ने एक सितंबर को पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित किया। वकीलों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने एक सितंबर को पूरे पेज के विज्ञापनों पर 340 करोड़ रुपये खर्च किए।

इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को हो सकती है।

राज्य सरकार के वकील ने क्या कहा?

राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि यह याचिका सुनवाई लायक नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता पहले ही अवमानना याचिका दायर कर चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने तीन अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दायर की है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि राज्य सरकार मामले में देरी करने के लिए रणनीति अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अभी तक आपत्तियों को दूर नहीं किया है।

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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत के ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सरकार इस त्रासदी की जिम्मेदारी से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।