मध्य प्रदेश के उमरिया में रहने वाले ओम और सविता अवधिया को वह दुखद खबर मिले अब लगभग दो साल होने वाले हैं, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। उनका बेटा अनीश अवधिया पुणे में आईटी इंजीनियर था। अनीश और उसकी दोस्त अश्विनी कोष्टा की मौत तब हो गई थी, जब उनकी बाइक को कथित तौर पर एक 17 साल के नशे में धुत लड़के द्वारा चलाई जा रही पोर्श कार ने टक्कर मार दी।

सविता अवधिया ने कहा, “जैसे-जैसे 18-19 मई नजदीक आ रही हैं, मुझे उस त्रासदी से पहले के दिनों की सारी यादें ताजा होने लगी हैं। मुझे वो पल याद आ रहे हैं जब मैंने उनसे बात की थी। फिर वही दिन, वही समय बस निकलता जा रहा है। हमारे दुख को और भी बढ़ा देता है कि हमने सब कुछ खो दिया है, लेकिन आरोपी का कुछ नहीं हुआ। ऐसा लगता है जैसे सब लोग पोर्श मामले को भूल गए हैं।”

आरोपी के सभी परिवारवाले जमानत पर बाहर

फिलहाल, आरोपी के सभी परिवारवाले जमानत पर बाहर हैं। नाबालिग को घटना के 15 घंटे के भीतर जमानत मिल गई थी। उसकी मां, जिस पर सबूतों से छेड़छाड़ और जांचकर्ताओं को गुमराह करने का आरोप था। अप्रैल 2025 के आसपास जमानत मिली थी। इस साल मार्च में, सुप्रीम कोर्ट ने पिता को जमानत दे दी। अवधिया परिवार ने इन सभी घटनाक्रमों को टीवी पर देखा। वे उत्सुक हैं कि अदालत में मामले की सुनवाई कब शुरू होगी।

हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है हम क्या करें- सविता अवधिया

सविता अवधिया ने कहा, “वकील काम कर रहे हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि क्या हो रहा है। हमें कुछ समझ में ही नहीं आ रहा कि हम आगे क्या करें।” वह आगे कहती हैं कि परिवार हर दिन दुख में जी रहा है।

जब गुस्सा आता है, तो वह दुख और व्यवस्था से निराशा के आवरण में लिपटा होता है। ओम अविधाय ने कहा, “सुनील टिंगरे जी के बारे में क्या कहें, जो तत्कालीन विधायक थे और नाबालिग की रक्षा के लिए सुबह 3 बजे येरवडा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे? उन्होंने डॉक्टरों और अन्य लोगों को भी इसमें शामिल किया। हमारा मानना ​​है कि टिंगरे को आरोपियों की लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था। यह इतनी दुखद दुर्घटना थी, फिर भी शक्तिशाली लोग जांच को बाधित करने में लगे हुए थे।” वे आरोप लगाते हैं कि पुलिस ने अनीश अवधिया के दोस्त को एफआईआर दर्ज करने से रोकने की कोशिश की थी। संयोग से, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिंगरे 2024 के विधानसभा चुनाव हार गए थे।

हमारे बच्चे वापस नहीं आएंगे- ओम अवधिया

ओम अवधिया ने आगे कहा, “हमारे बच्चे वापस नहीं आएंगे, लेकिन हमें यह जानकर खुशी हुई कि दुर्घटनास्थल पर उनकी याद में एक बोर्ड लगाया गया था। अब, वह बोर्ड हटा दिया गया है। अगर बोर्ड या कोई स्मारक बनाया जाता, तो हमें कुछ राहत मिलती, ताकि अन्य धनी माता-पिता अपने नाबालिगों को कार देने से पहले संकोच करें।”

उनका कहना है कि पुणे और पूरे देश के लिए पोर्श कांड को न भूलना बेहद जरूरी है। ओम अवधिया ने कहा, “यह इस बात की याद दिलाता है कि ताकतवर लोग भी जेल जा सकते हैं।” उनके लिए यादें बहुत मायने रखती हैं, सिर्फ अतीत की तस्वीरों के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत भी। ओम अवधिया पूछते हैं, “हमारी अपील है कि पुणे के लोग उस जगह पर जाएं और एक छोटा सा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करें। हम मध्य प्रदेश में हैं और घर पर ही शोक मनाएंगे। लेकिन क्या स्थानीय विधायक और पुणे के कुछ लोग हमारे साथ शोक मनाने आएंगे?”

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

महाराष्ट्र के पुणे जिले के चर्चित पोर्श हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने नाबालिग के परिवार को सबूतों से छेड़छाड़ करने में मदद की और ब्लड सैंपल बदल दिए। पढ़ें पूरी खबर…