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माओवादी कनेक्शन के शक में सोशल एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी के घर पर छापा

यलगार परिषद मामले में जारी जांच के तहत सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के झारखंड स्थित घर पर छापेमारी की गई। इस मामले में माओवादियों से कथित संबंध के सिलसिले में नौ कार्यकर्ताओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

Author पुणे | June 12, 2019 4:44 PM
सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के झारखंड के रांची स्थित घर पर पुणे पुलिस की छापेमारी (फाइल फोटो)

सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के झारखंड के रांची स्थित घर पर पुणे पुलिस ने बुधवार को छापेमारी कर कुछ “इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री” जब्त करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार यलगार परिषद मामले में जारी जांच के तहत यह छापेमारी की गई। इस मामले में माओवादियों से कथित संबंध के सिलसिले में नौ कार्यकर्ताओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘यलगार परिषद मामले में जारी जांच के तहत हमारी टीम ने स्वामी के रांची स्थित घर पर छापेमारी की। अभी तक, हमने उनके घर से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामन जब्त किया है।’’ उन्होंने बताया कि स्वामी को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है।

पुणे पुलिस ने पिछले साल अगस्त में राष्ट्रीय स्तर पर की गई छापेमारी के दौरान भी स्वामी के घर से कुछ सामग्री जब्त की थी। गौरतलब है कि मामला 31 दिसंबर 2017 को हुए यलगार परिषद सम्मेलन से जुड़ा है। पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के लिए माओवादियों ने धन खर्च किया था। पुलिस के आरोप पत्र के अनुसार इस सम्मेलन में कुछ कार्यकर्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके अगले दिन पुणे के पास कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा हुई थी। पुणे पुलिस ने नौ कार्यकर्ताओं सुधीर धावले, शोमा सेन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन, वर वर राव, अरूण फेरेरा, सुधा भारद्वाज और वरर्नोन गोंजाल्विस के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया हुआ है।

इस आरोप पत्र में फरार माओवादी नेता दीपक उर्फ मिलिंद तेलतुम्बड़े, किशनदा उर्फ प्रशांत बोस, प्रकाश उर्फ रितुपर्ण गोस्वामी, सीपीआई (माओवादी) महासचिव गणपति उर्फ चंद्रशेखर का भी नाम है। इन लोगों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और अपने प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा को फैलाने के साथ समाज में जातीय संघर्ष और घृणा फैलाने का भी आरोप है।पुलिस के अनुसार इन सभी लोगों पर कठोर कहे जाने वाले गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी कार्रवाई की गई है।

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