पुणे में बढ़ते शोर प्रदूषण को लेकर पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने के आरोप में अवमानना याचिका दायर की गई है। शहर के पांच प्रमुख संगठनों ने संयुक्त रूप से यह याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस विभाग शोर प्रदूषण रोकने के लिए अदालत के बाध्यकारी निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने में विफल रहा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुणे में धार्मिक त्योहारों, राजनीतिक कार्यक्रमों, जुलूसों और अन्य आयोजनों के दौरान कई वर्षों से लोगों को अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस के पास नियमों के उल्लंघन से निपटने के लिए व्यवस्था होने के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण जमीन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है और शोर प्रदूषण नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

गणेश उत्सव और जुलूसों में बढ़ता शोर

याचिका में कहा गया है कि गणेश उत्सव के दौरान, खासकर गणेश विसर्जन के जुलूसों में, ध्वनि का स्तर बेहद खतरनाक हो जाता है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कुछ आधुनिक और हाई-पावर साउंड सिस्टम से करीब 100 डेसिबल तक का शोर पैदा होता है, जो लोगों के कानों और स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, जुलूसों में इस्तेमाल होने वाली तेज लेजर लाइटों को भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है।

81 वर्षीय याचिकाकर्ता विलास लेले ने कहा कि उन्हें किसी भी गणेश मंडल या त्योहार से आपत्ति नहीं है, लेकिन महानगरों में बढ़ता शोर अब इतना ज्यादा हो गया है कि लोगों को अपने ही घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि गणेश विसर्जन के दौरान शोर असहनीय होने के कारण उन्हें कई बार शांत जगह पर जाना पड़ता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का हवाला

याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 अगस्त 2024 के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अदालत ने शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। उनका आरोप है कि पुलिस विभाग की निष्क्रियता केवल प्रशासनिक देरी या लापरवाही नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना के समान है।

याचिकाकर्ताओं में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, भारतीय मजदूर संघ, पुणे जिला कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी एंड अपार्टमेंट्स फेडरेशन, वरिष्ठ नागरिक विलास लेले और श्री स्वामी समर्थ सहकारी संस्था शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्य मुले ने कहा कि लोग लगातार पुलिस से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जमीन पर पर्याप्त कार्रवाई नजर नहीं आती।

पुलिस कमिश्नर ने आरोपों पर क्या कहा?

पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा कि पुलिस गणेश मंडलों के साथ लगातार चर्चा कर रही है और निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक शोर होने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ईद के जुलूस के दौरान पुलिस ने छह प्लाज्मा साउंड सिस्टम जब्त किए और 148 मंडलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

कुमार ने कहा कि उन्हें अभी तक अवमानना याचिका की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस का रुख स्पष्ट है, जहां भी डेसिबल स्तर की निर्धारित सीमा का उल्लंघन पाया जाता है, वहां सख्त कार्रवाई की जाती है। अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा सामने आएगा कि पुणे पुलिस ने हाई कोर्ट के निर्देशों को किस हद तक प्रभावी रूप से लागू किया है।

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केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जुएल ओराम ने शुक्रवार को बड़ा आरोप लगाया। जुएल ओराम ने कहा कि उनको अपनी ही पार्टी के भीतर बदनाम करने और केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर निकालने की साजिश की जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।