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Pulwama Terror Attack: जहां धमाका किया, वहां से 10 किलोमीटर दूर रहता था आदिल अहमद डार

Jammu and Kashmir Pulwama's Awantipora Terror Attack: आदिल अहमद डार ने जिस वक्त जैश ए मोहम्मद ज्वाइन किया था, उस वक्त वह 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जैश ए मोहम्मद ने आदिल अहमद की पहले से रिकॉर्ड की गई एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की है।

Author Updated: February 15, 2019 1:52 PM
Pulwama terror attack: पुलवामा आतंकी हमले का गुनाहगार आदिल अहमद डार।

Jammu and Kashmir Pulwama’s Awantipora Terror Attack: गुरुवार को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पूरा देश सदमे में है। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले को अंजाम दिया जैश ए मोहम्मद के 20 साल के आतंकी आदिल अहमद डार ने। आदिल अहमद डार ने एक साल पहले ही आतंक की राह चुनी थी। न्यूज 18 की एक खबर के अनुसार, पुलवामा में जिस जगह आदिल अहमद डार ने अपनी कार सीआरपीएफ के काफिले से टकरायी, वहां से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर ही उसका गांव गुंडीबाग है, जहां आदिल रहता था। दक्षिण कश्मीर का पुलवामा इलाका आतंकवाद की दृष्टि से काफी अशांत माना जाता है। बता दें कि पुलवामा आतंकी हमला कश्मीर घाटी में हुआ अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है।

आदिल अहमद डार ने जिस वक्त जैश ए मोहम्मद ज्वाइन किया था, उस वक्त वह 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जैश ए मोहम्मद ने आदिल अहमद की पहले से रिकॉर्ड की गई एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की है। इस वीडियो में आदिल अहमद ऑटोमैटिक राइफल्स के साथ बैठा दिखाई दे रहा है। वीडियो में आदिल कहता सुनाई दे रहा है कि ‘हमारे आतंकी कमांडरों को मारकर तुम हमें कमजोर नहीं कर सकते।’ आदिल अहमद 19 मार्च, 2016 को अपने दो दोस्तों के साथ अपने घर से लापता हो गया था। दरअसल आदिल अहमद के साथ लापता हुए तौसीफ का बड़ा भाई मंजूर अहमद डार एक आतंकी था, जो कि साल 2016 में मारा गया था। इसके बाद ही आदिल और उसके दोस्तों ने आतंकी की राह चुन ली थी।

उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ के 78 वाहनों का काफिला, जो कि जम्मू से श्रीनगर जा रहा था। उस पर आदिल अहमद डार ने पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एसयूवी टकरा दी थी। एसयूवी के टकराते हुए तेज धमाका हुआ, जिसमें सीआरपीएफ के काफिले की एक बस के चिथड़े उड़ गए। बस में बैठे जवान इस हमले में शहीद हो गए। गौरतलब है कि जैश ए मोहम्मद इससे पहले भी घाटी में कई आत्मघाती हमलों को अंजाम दे चुका है। साल 2001 में भी जैश ने श्रीनगर स्थित सचिवालय पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद साल 2016 में उरी हमले में भी जैश का हाथ होने की बात सामने आयी थी। इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। बीते साल भी जैश ने पुलवामा के पुलिस हेडक्वार्टर पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 5 जवान शहीद हो गए थे।

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