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Pulwama Attack: इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से परेशान हुआ मुंबई का ये बुक डिपो, 5 हजार की सामान के लिए देने होंगे दो लाख

मुंबई में पाकिस्तानी अखबारों और मैगजीन के एक विक्रेता को पुलवामा हमले के बाद बढ़ी इम्पोर्ट ड्यूटी की वजह से खासी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है।

Author Published on: April 13, 2019 6:21 PM
नाज बुक डिपो के मोहम्मद आसिफ (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के दौरान मुंबई में पाकिस्तानी अखबार और मैगजीन विक्रेता आसिफ को इम्पोर्ट डयूटी बढ़ने से काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि इस साल फरवरी तक पाकिस्तान से समाचार पत्रों और पत्रिकाओं पर कोई आयात शुल्क नहीं था। लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत ने 16 फरवरी को पाकिस्तानी सामानों पर आयात शुल्क 200 प्रतिशत कर दिया। इससे जहां पाकिस्तानी अखबार और मैगजीन विक्रेता को पहले पांच हजार रुपए देने पड़ते थे अब उसी सामान के लिए उसको दो लाख चुकाने होंगे।

भारत में भी हैं पाकिस्तानी लेख के पाठकः दक्षिण मुंबई के रहने वाले मोहम्मद अली रोड पर स्थित नाज बुक डिपो के 50 वर्षीय आसिफ पीढ़ियों  से पाकिस्तानी अखबार और मैगजीन को इम्पोर्ट कर भारत में बेचते हैं। बताया जा रहा है कि आसिफ के पिता अब्दुल्ला हाजी अली मोहम्मद द्वारा यह व्यापार 70 साल पहले शुरू किया गया था। आसिफ के पास पाकिस्तानी अखबारों और पत्रिकाओं का अच्छा स्टॉक रहता है जिसमें अखबार द डेली जंग, नया वक्त, डॉन और जसरत जैसे काफी प्रसिद्ध अखबारों को 30 से 50 रुपए में बेचते हैं। इसके जरिए वे 5 से 10 रुपए प्रति अखबार मुनाफा कमा लेते हैं।

पुलवामा हमले के बाद कैसे हुआ नुकसान: बता दें कि आसिफ दशकों से ये व्यापार करते आ रहे हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आयात होने वाली कुछ सामग्रियों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 200 प्रतिशत बढ़ा दी। जब आसिफ 19 फरवरी को दुबई से हवाई जहाज के जरिए कराची से भेजे गए पाकिस्तानी साहित्य की अपनी नियमित खेप लेने के लिए हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उन्हें मालूम हुआ की जिस सामान को लेने के लिए उन्हें 5 हजार देने पड़ते थे अब उसी के लिए दो लाख देने होंगे।

 

हालात सामान्य होने का इंतजार: बता दें कि इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद से आसिफ ने पाकिस्तानी अख़बार और किताबें मंगाना बंद कर दिया है। आसिफ कहते हैं कि शायद चुनाव बाद हालात थोड़े सामान्य हो सके।

कस्टम विभाग के ऑफिस का चक्कर काट रहेंः सरकार द्वारा लगाए गए भारी इम्पोर्ट डयूटी से आसिफ परेशान है। उनका कहना है, “एक कंसाइनमेंट में कुछ बंडल होते हैं और प्रत्येक बंडल का वजन लगभग 5 किलोग्राम होता है और कुल बंडल का वजन 40 किलोग्राम होता है। पहले हमारी लागत लगभग 5,000 रुपए की होती थी लेकिन जब से इम्पोर्ट ड्यूटी के वृद्धि में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को भी शामिल किया गया, मुझे 2 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया। इतनी बड़ी डयूटी देना मेरी क्षमता से बाहर है। क्या ग्राहक कभी 450 रुपये की पत्रिका खरीदेंगे?” वहीं आसिफ ने यह भी बताया कि वे हर 10 दिन में कस्टम विभाग के ऑफिस जाते हैं ये पता करने के लिए कि नियमों में कोई बदलाव हुआ है।

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