केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में एनआर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है। पिछले पांच वर्षों में विकास कार्यों की कमी, बेरोजगारी समेत अन्य मुद्दे पर सत्तारूढ़ गठबंधन को घेरने की विपक्ष की कोशिश कमजोर पड़ सकती है। दरअसल, आखिरी वक्त तक सीट बंटवारे पर सहयोगियों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बनने की वजह से कई सीटों पर विपक्षी गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं।

पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर सत्तारूढ़ एनआर कांग्रेस और भाजपा का मुकाबला विपक्षी गठबंधन से होगा। विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और विदुथलाई चिरूथैगल काची (वीसीके) सहित कुछ सीट पर स्थानीय दल भी सहयोग कर रहे हैं। चुनावी समर में उतरे तमाम दलों की तरफ से मतदाताओं को साधने की पूरी कोशिश की जा रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन की कोशिश दोबारा सत्ता में बने रहने की है तो विपक्षी गठबंधन ने भी बदलाव के लिए कमर कस ली है। सभी राजनीतिक दलों की तरफ से जनता से लुभावने वादे किए जा रहे हैं।

इंडिया गठबंधन में बिखराव

जानकारों के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के कुछ सीटों पर आमने-सामने होने से उनकी एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। विधानसभा चुनावों से पहले वीसीके ने ओझुकारई, ओसुडु (आरक्षित) और नेट्टापक्कम (आरक्षित) के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। द्रमुक ने भी पांच सीट पर जबकि वामदलों ने भी तीन सीटों पर अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है, जिसे सीट बंटवारे के दौरान हुए विवादों के असर के तौर पर देखा जा रहा है।

राजभवन सीट से द्रमुक के उम्मीदवार विग्नेश कन्नन ने बातचीत में कहा, सत्तारूढ़ गठबंधन ने पिछले पांच वर्षों के दौरान न तो विकास कार्य किए और इस दौरान बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा, अगर मौजूदा समस्याएं खत्म नहीं की गईं तो स्थानीय लोगों के लिए पुडुचेरी केवल पर्यटकों के लिए रह जाएगा। इस दौरान सरकारी शिक्षा, अस्पताल या किसी अन्य सेवाओं में सुधार नहीं आया। कई आधारभूत सुविधाएं भी पिछले दिनों के दौरान बदहाल हुई हैं। उन्होंने दोस्ताना मुकाबले पर कहा, चुनाव में ऐसा कोई मुकाबला नहीं होता है और राजनीति में कोई दोस्त नहीं होता है। उन्होंने कहा, कांग्रेस और द्रमुक के प्रत्याशियों के आमने-सामने होने से सत्तारूढ़ दल को मतों का नुकसान होगा।

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