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बीजेपी के 2 साल पूरे होने पर बोली मायावती, कहा- जश्न के नाम पर बहाया गया सरकारी पैसा

बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को आरोप लगाया कि केंद्र की राजग सरकार के दो वर्ष पूरा होने पर विशेषकर भाजपा की ओर से जश्न मनाने के लिए बडेÞ पैमाने पर सरकारी धन और संसाधनों की फिजूलखर्ची की गई है।

Author लखनऊ | May 27, 2016 3:48 AM
BJP के 2 साल के जश्न पर मायावती का मोदी सरकार पर निशाना

बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को आरोप लगाया कि केंद्र की राजग सरकार के दो वर्ष पूरा होने पर विशेषकर भाजपा की ओर से जश्न मनाने के लिए बडेÞ पैमाने पर सरकारी धन और संसाधनों की फिजूलखर्ची की गई है। मायावती ने कहा कि भाजपा को अपने पूर्व के ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान के कड़वे अनुभव से सीख लेकर इस धन और संसाधन को सर्वसमाज के व्यापक जनहित और जन कल्याण में खर्च करना चाहिए था। उन्होंने एक बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर जश्न मनाने का मामला पूरी तरह से सरकारी है और एकतरफा भी। क्योंकि इस भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकलापों के प्रति देश की आम जनता में न तो उत्साह है और न ही पुराना जोश।

मायावती ने कहा कि भाजपा को अपने पुराने बहुप्रचारित ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान से सबक सीखना चाहिए, जब देश की जनता ने भाजपा सरकार द्वारा इसी प्रकार से काफी तड़क-भड़क के साथ किए गए बड़े-बड़े दावों को जमीनी हकीकत से दूर माना था और उसके अगले चुनाव में ही भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया था। उन्होंने कहा कि वैसे भी आज देश में जिस प्रकार ज्वलंत समस्याओं का ढेर लगा हुआ है और कुछ मुट्ठी भर धन्नासेठों व आरएसएस एंड कंपनी के लोगों को छोड़कर देश की लगभग 125 करोड़ जनता परेशान है। ऐसी हालत में केंद्र सरकार को शोभा नहीं देता कि वह सरकारी धन की फिजूलखर्ची कर लोगों की गरीबी व मजबूरी का मजाक उड़ाए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि मोदी सरकार जनहित से जुडेÞ अपने किसी भी प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने में अब तक नाकाम रही है। इनमें से खासकर विदेश से काला धन वापस लाकर देश के करोड़ों गरीबों में बांटना, युवाओं को रोजगार, देश की जनता के लिए बिजली, सड़क, पानी, किसानों को दोगुना लाभकारी मूल्य, लोगों के लिए ‘अच्छे दिन लाना’ जैसे वादे किए गए थे।

इन वादों के पूरा नहीं होने पर जनता में नाराजगी है और वह ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता जोश से निकलकर अब होश में आ गई है और मौका आने पर अपने आक्रोश को व्यक्त करते हुए भाजपा को करारा सबक भी सिखाती रहती है। अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा के आम चुनावों के नतीजे इसका स्पष्ट प्रमाण हैं।

भाजपा को असम विधानसभा चुनाव में मिली जीत पर मायावती ने कहा कि जहां तक असम में भाजपा की जीत का सवाल है, वहां मोदी सरकार का कार्यकलाप नहीं, बल्कि सांप्रदायिक धु्रवीकरण और सांप्रदायिकता विरोधी वोटों का बिखराव भाजपा की जीत की वजह बना। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार के बनने के बाद से ही धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलिम समाज के लोगों के साथ भेदभाव, उनके जानमाल और मजहब पर हमले बढ़ गए हैं। दलितों और अन्य पिछड़ों के प्रति भी इस सरकार का रवैया अत्यंत जातिवादी व पक्षपातपूर्ण रहा है।

मायावती ने कहा कि रोहित वेमुला का मामला इसका स्पष्ट उदाहरण है। उसके परिवार को आज तक न्याय नहीं मिल पाया है। इसके अलावा केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह का दलितों के खिलाफ घोर आपत्तिजनक व निंदनीय बयान यह साबित करता है कि इस सरकार की मानसिकता कितनी ज्यादा घातक, जातिवादी व दलित विरोधी है।

उन्होंने कहा कि दो साल के कार्यकाल में मोदी सरकार धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाली, सांप्रदायिक सद्भाव और सहिष्णुता को आघात पहुंचाने वाली सरकार साबित हुई है, इसने देश की धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक मंशा पर कुठाराघात करते हुए सरकार के धार्मिक निष्पक्षता के सिद्धांत को लगभग समाप्त कर दिया है। इससे देश की स्थापित प्रतिष्ठा को विश्व स्तर पर बड़ा आघात लगा है।

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