शनिवार को अहमदाबाद की जामा मस्जिद के बाहर यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करने के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने पांच प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। इन लोगों ने ईद की नमाज के बाद मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया।

यह प्रदर्शन एआईएमआईएम की ओर से किया गया था। उनका कहना था कि यूसीसी को वापस लिया जाना चाहिए। पिछले कुछ महीनों में देश भर में यूसीसी के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों में शामिल एक महिला ने कहा, ‘हम यूसीसी का विरोध कर रहे हैं, शरीयत में ऐसा कुछ नहीं लिखा है और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए।’ प्रदर्शनकारियों ने हाथों में जो पोस्टर लिए हुए थे उनमें लिखा था- यूसीसी शरीयत के खिलाफ है और इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों में शामिल एक शख्स ने कहा, “यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 25 और महिलाओं के खिलाफ है। यह लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा देता है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।”

ईद के मद्देनजर सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार के द्वारा बनाए गए एक पैनल ने 17 मार्च को ही यूसीसी को लेकर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

विधानसभा में पेश किया गया विधेयक

गुजरात सरकार ने 18 मार्च को विधानसभा में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक, 2026 पेश किया था। इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान कानून बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

विधेयक को 24 मार्च को विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो उत्तराखंड के बाद गुजरात भारत का दूसरा राज्य होगा जो यूसीसी को लागू करेगा।

समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

उत्तराखंड में जनवरी, 2026 में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुआ था। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि यह किसी धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य सभी को समान अधिकार प्रदान करना है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।