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प्रियरंजन की रिपोर्ट : आरक्षित कोटे के छात्रों के लिए दाखिले में अनेक सहूलियतें

डीयू में कश्मीरी विस्थापितों के लिए पांच फीसद अतिरिक्त कोटा है। साथ ही पहली बार जम्मू के कश्मीरी छात्र भी कोटा के हकदार होंगे।

Author नई दिल्ली | June 16, 2016 3:05 AM
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने बुधवार देर शाम दाखिले की पहली कटआॅफ जारी कर दी।। (Photo Source: Indian Express)

आरक्षित कोटे के छात्र अगर थोड़ी सावघानी बरतें तो दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिला अपेक्षाकृत आसानी से पा सकते है। डीयू के दाखिले में आरक्षण लागू है। दाखिले की इस होड़ में बेस्ट फोर के अंकन वाली कटआफ में एक फीसद की गिरावट भी सैकड़ों छात्र लाभान्वित होते हों, वहां आरक्षण वाली छूट बड़ी राहत देती है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेस्ट फोर में आठ से 10 फीसद तक की छूट कितनी राहत देगी। अनुसूचित जाति-जनजाति व विकलांग कोटे में तो यह छूट 15 फीसद तक जाती है। फिर भी सीटें खाली रहती हैं। लेकिन कई ऐसे छात्र जो इसके हकदार होते हुए भी असावधानी की वजह से इस छूट का फायदा नहीं उठा पाते हैं।

डीयू में ओबीसी के लिए 27 फीसद, अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए 7.5 फीसद, शहीदों की पत्नी और उनके बच्चों के लिए 5 फीसद, विदेशी छात्रों के लिए 5 फीसद, विकलांग छात्रों के लिए 3 फीसद सीटे आरक्षित हैं। विश्वविद्यालय एक के बाद एक कटआफ निकालता है और आरक्षित कोटे की सीटें नहीं भरतीं, जबकि दूसरी ओर इस कोटे के कई छात्र तय प्रक्रिया का पालन न कर पाने की वजह से लाभ से वंचित हो जाते हैं।

इस बार आनलाइन आवेदन हो रहे हैं। इसमें फार्म जमा होने का बाद दोबारा सुधार के विकल्प नहीं हैं। इसके लिए एससी-एसटी,ओबीसी छात्रों को खुद के नाम से जारी जाति प्रमाणपत्र आवेदन फार्म के साथ अटैच करना होगा। यह प्रमाण पत्र जिला के उपायुक्त (डीसी) या प्रखंड अधिकारी की ओर से जारी और छात्र की ओर से स्वहस्ताक्षरित होना जाहिए। कश्मीरी विस्थापित छात्रों के लिए कश्मीरी विस्थापित प्रमाणपत्र, दिव्यांग जनों को छूट के लिए सूची में दर्ज सरकारी अस्पतालों व बोर्ड से जारी प्रमाणपत्र जिसमें दिव्यांगता के फीसद का उल्लेख हो,आवेदन फार्म के साथ अटैच करना होगा। इसे डाउनलोड करते समय स्वहस्ताक्षरित होना जरूरी है।

डीयू में सीटें बढ़ने से इस साल आरक्षण कोटे की सीटों में भी इजाफा हुआ है। मसलन विशेष (दिव्यांग) छात्रों के लिए अब करीब 1800 सीटें आरक्षित हैं। पहले यह संख्या 1500 के आसपास थी। नियम के मुताबिक कुल सीटों का 3 फीसद दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षित हैं। लेकिन यहां जरूरी है कि 40 फीसद से ज्यादा विक लांगता छात्रों के नाम से जारी सर्टिफिकेट में दर्ज हो।

विश्वविद्यालय में इन छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था भी है। उतरी परिसर स्थित ‘ब्रेल लाइब्रेरी’ में कई पाठ्यक्रमों की सामाग्रियां ब्रेल लिपि में उपलब्ध हैं। इसके अलावा देख न सकने वाल छात्रों के लिए जेएडब्लूएस साफ्टवेयर युक्त कंप्यूटर केंद्र भी हैं। जिनके जरिए वे सुनकर भी अपना पठ्यक्रम पूरा कर सकते हैं। इस बाबत उनके पठन-पाठन के लिए बनाए गए केंद्र पूरी तरह केंद्रीकृत हैं। यहां स्क्रीन रीडर व वायस रिकार्डिग की सुविधा भी है। इसके अलावा कुछ कालेजों ने अपने स्तर पर विशेष जनों के लिए कुछ विशेष सुविधाएं भी दी हैं। मसलन खालसा कालेज, मीरांडा हाउस, श्री राम कालेज आफ कामर्स, कमला नेहरू कालेज ने शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए रैंप, लिफ्ट और विशेष शौचालय बनाया है।

जानकारी के मुताबिक इस बार दिब्यांग कोटे में अभी तक कम आवेदन आएं हैं। बीते साल 700 से ज्यादा इस कोटे में दाखिला हुआ था। इस बार अभी तक यह आंकड़ा महज पांच सौ को पार कर पाया है। इसमें बाहरी छात्रों की खासी तादाद है। इन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय होस्टलों में भी 5 फीसद आरक्षण दे रहा है। इन्हें दाखिला में सामान्य छात्रों की जगह पांच फीसद की छूट मिलेगी। अगर आरक्षित सीटें फिर भी नहीं भरीं तो उन्हें बेस्ट फोर में और छूट मिलेगी। इतना ही नहीं शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों को फीस में भी रियायत है। आम छात्रों के लिए दाखिला शुल्क 100 रुपए रखा गया है। लेकिन अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों और दिव्यांग श्रेणी के छात्रों के लिए आवेदन शुल्क 50 रुपए है।

डीयू में कश्मीरी विस्थापितों के लिए पांच फीसद अतिरिक्त कोटा है। साथ ही पहली बार जम्मू के कश्मीरी छात्र भी कोटा के हकदार होंगे। इस साल से कश्मीरी विस्थापितों के लिए भी अलग कट आफ जारी की जा सकती है। कश्मीरी विस्थापितों की श्रेणी के तहत उम्मीदवारों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों की आखिरी कट आॅफ सूची में अधिकतम दस फीसद तक की राहत मिलने की उम्मीद है। हालाकि इनमें वे पाठ्यक्रम शामिल नहीं हैं, जिनमें दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा जरूरी होती है।

इसके अलावा इन कोटे के उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित न्यूनतम पात्रता मानदंड पूरे करने होंगे और उन्हें नियमित दस्तावेजों के अलावा आवेदन के साथ कश्मीरी विस्थापित का अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र, कश्मीर में संपत्ति का प्रमाण और दिल्ली में मौजूदा घर का प्रमाण देना होगा। जानकारी के मुताबिक इस कोटे के तहत दाखिला सामान्य दाखिला प्रक्रिया के साथ नहीं होगा क्योंकि यह कोटा विश्वविद्यालय के दूसरे आरक्षित श्रेणियों से अधिक होने की संभावना है।

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