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Election 2019: प्रियंका इफेक्ट! सपा-बसपा का सिरदर्द बढ़ाने की तैयारी में भीम आर्मी

लोकसभा चुनाव से पहले भीम आर्मी उत्तर प्रदेश की दो बड़ी पार्टियां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती है। खबर है कि भीम आर्मी चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है या फिर जहां सपा-बसपा गंठबंधन कमोजर हैं

मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी, और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद(फोटो – ANI)

लोकसभा चुनाव से पहले भीम आर्मी उत्तर प्रदेश की दो बड़ी पार्टियां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती है। खबर है कि भीम आर्मी चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है या फिर जहां सपा-बसपा गठबंधन कमोजर हैं, वहां अन्य उम्मीदवारों को समर्थन भी दे सकती है।चुनावी बयार के बीच भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने साफ किया है कि वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे और स्मृति ईरानी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारे जाएंगे।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित युवाओं के बीच खास जगह बना चुकी भीम आर्मी बसपा-सपा के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है। भीम आर्मी के सूत्रों की मानें तो पार्टी बहुजन समुदाय से ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।

आजाद का कहना है कि हमारा लक्ष्य बीजेपी को हराना है।इसलिए मैं मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। स्मृति ईरानी के खिलाफ उम्मीदवार कौन होगा इसका फैसला फिलहाल पार्टी ने नहीं किया है। शुक्रवार को पार्टी जंतर मंतर पर रैली के दौरान बड़ा ऐलान कर सकती है। आजाद का यह बयान प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद आया। राजनीतिक गलियारे में इनकी मुलाकात को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन आजाद का कहना है कि वह कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन नहीं करने जा रहे हैं। भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह का कहना है कि हमारा पहला समर्थन सपा-बसपा गठबंधन को ही होगा लेकिन जिस क्षेत्र में लगेगा कि बीजेपी को हराने में इस गठबंधन का उम्मीदवार कमजोर है। वहां हम किसी अन्य पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देंगे जो बीजेपी को हरा सकेगा।

गौरतलब है कि भीम आर्मी का कहना था कि वह राजनीति में नहीं आएगी लेकिन अब यह संगठन राजनीति में पूरी तरह से भाग लेता दिख रहा है। भीम आर्मी के इस फैसले से नुकसान बसपा को सबसे ज्यादा है।बसपा ने दो दिन पहले ही ऐलान किया था कि कांग्रेस के साथ बसपा कोई गठबंधन नहीं करेगी। साल 2017 में सहारनपुर हिंसा के दौरान मायावती ने भीम आर्मी को भाजपा की बी टीम बताया था। आजाद ने सबकुछ भूलते हुए  मायावती को प्रधानमंत्री बनने के लिए समर्थन भी जाहिर किया था। हालांकि, पांच दिन पहले, वह बसपा-सपा गठबंधन को अपना समर्थन देने के लिए तैयार थे।

दिल्ली में उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव से सफाई मांगी कि क्यों उनके सांसद यशवीर सिंह ने 2012 में एसएसी/एसटी कोटा बिल संसद में फाड़ दिया था। और मुलायम सिंह से सवाल करते हुए कहा कि वह नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने की मंशा क्यो जता चुके हैं।गौरतलब है कि भीम आर्मी सरकारी नौकरियों में जनरल कैटगरी वालों को आर्थिक आधार पर दिए जा रहे 10 प्रतिशत आरक्षण को वापस लेने के लिए जंतर मंतर पर हुंकार रैली करेगी।

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