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यूपी कांग्रेस चीफ की खोज में जुटीं प्रियंका गांधी, रेस में सबसे आगे अजय कुमार लल्लू, जानें क्यों बने दावेदार

छात्र राजनीति करते वक्त लल्लू के पास पैसे नहीं रहते थे। जब उन्होंने पार्टी जॉइन की तब भी वो आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उनके भाई प्रति माह 5 हजार रुपए देते थे, जिससे वो राजनीति करते थे। ये सिलसिला 2012 तक चलता रहा है।

Author कानपुर | Updated: September 10, 2019 2:43 PM
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू (फोटो- स्थानीय)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों से स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी राज्य में हाशिए पर जा चुकी है। पार्टी की यह हालत देखकर नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका है। संगठन को दोबारा खोई हुई पहचान दिलाने की जिम्मेदारी महासचिव प्रियंका गांधी के कंधों पर है। प्रियंका गांधी ने संगठन के लिए दिनरात संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को ढूंढना शुरू किया तो उनकी नजर अजय कुमार लल्लू पर पड़ी। अजय कुमार लल्लू इतने जमीनी नेता हैं कि वो संगठन के लिए कई-कई महीनों तक घर भी नहीं जाते हैं।

समर्पण ऐसा की शादी तक नहीं कीः कांग्रेसी नेता अजय कुमार लल्लू मूल रूप से कुशीनगर के सिरोही गांव के रहने वाले हैं और तमकुही क्षेत्र से विधायक हैं। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव इसी सीट से जीते हैं। उनके पिता शिवनाथ प्रसाद का निधन हो चुका है। वो मां और भाइयों के साथ रहते हैं। अजय कुमार लल्लू ने अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया। उन्होंने शादी तक नहीं की है। गरीबों के हक की लड़ाई की वजह से वो कई बार जेल जा चुके हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र में जिला प्रशासन सब्जी और कुलचे वालों के ठेले हटवा रहा था। इस बात को लेकर वो धरने पर बैठ गए और बड़ा आंदोलन छेड़ दिया था, इसमें वो लगभग 15 दिनों तक जेल में रहे थे।

सुब्बाराव से प्रभावित हैं अजय कुमारः लल्लू छात्रसंघ चुनावों में भी सक्रिय रहे हैं। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली। संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत की और समाज हित को मुद्दों लेकर आंदोलन करने लगे। कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद पांडेय बताते है कि अजय कुमार लल्लू गांधीवादी विचार धारा रखने वाले समाज प्रचारक सुब्बाराव से प्रभावित हैं। वह सुब्बाराव को अपना गुरु मानते हैं और अपने जीवन का लंबा समय उनके साथ बिता चुके हैं। कई सालों तक उनके साथ काम किया और उनसे बहुत कुछ सीखा है।

सादगी के लिए लोकप्रिय हैं लल्लूः संगठन को मजबूत करने की लगन ऐसी है कि कई महीनों तक घर ही नहीं जाते हैं। उनके साथी बताते हैं कि वो जहां जो मिलता है वही खा लेते हैं और जहां जगह मिले सो जाते हैं। साधारण रहन-सहन वाले लल्लू दिन-रात काम कर सकते हैं। संगठन के प्रति लगाव को देखते हुए पार्टी हाईकमान ने उन्हें विधानमंडल दल का नेता बना दिया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में अजय कुमार लल्लू और अराधना मिश्रा ये दो ऐसे नेता थे जो लगातार दोबारा चुनाव जीते थे। लेकिन अजय कुमार लल्लू को संगठन के मामले में ज्यादा अनुभव है।

भाइयों से पैसे लेकर करते थे राजनीतिः छात्र राजनीति करते वक्त लल्लू के पास पैसे नहीं रहते थे। जब उन्होंने पार्टी जॉइन की तब भी वो आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उनके भाई प्रति माह 5 हजार रुपए देते थे, जिससे वो राजनीति करते थे। ये सिलसिला 2012 तक चलता रहा है। जब वो विधायक बन गए तो अपने भाइयों से पैसे लेना बंद कर दिए। उन्होंने बताया कि अजय कुमार लल्लू अपनी मां और भाइयों से बहुत प्यार करते हैं। जब वो घर पर होते है तो मां से मिले बिना सोते नहीं हैं। सुब्बाराव जैसी महान शख्सियत का उन पर बहुत बड़ा असर पड़ा है, जिसकी वजह से वो प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

यूं प्रियंका की नजर में आए लल्लूः लोकसभा चुनाव 2019 से पहले प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी ने पूर्वी यूपी के लगभग सभी जनपदों में जनसभाएं कीं। लेकिन इसके बाद परिणाम कांग्रेस पार्टी के पक्ष में नहीं आए। चुनाव के बाद पार्टी ने हार पर मंथन किया और प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया। प्रियंका गांधी ने ऊर्जावान जुझारू नेताओं और कार्यकर्ताओं की तलाश शुरू की। वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर काम करने वाले नेताओं को छांटा गया तो प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए तय मानकों में लल्लू फिट दिखे।

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कांग्रेस पार्टी में जितने भी प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। उनसे आम कार्यकर्ताओं की सीधे मुलाकात नहीं हो पाती थी। कार्यकर्ता अपने मन की बात और समस्या नहीं बता पाते थे। पहली बार ऐसा होने जा रहा कि एक आम कार्यकर्ता को प्रदेश की कमान सौंपने पर विचार किया जा रहा है। यदि अजय कुमार लल्लू प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो छोटे कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता सीधा संवाद कर सकते हैं।

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