जयपुर में 12वीं कक्षा के छात्र की मौत के मामले को लेकर बवाल हो गया है। छात्र के माता-पिता का आरोप है कि लंच में उनके बेटे ने स्कूल की कैंटीन से पैटीज खाई थी, इसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई और उसकी मौत हो गई।
इस मामले में अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को स्कूल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया है।
छात्र का नाम प्रिंस सोनी है। प्रिंस सोनी कांता चौराहा के पास स्थित महाराणा प्रताप स्कूल का छात्र था। परिवार के लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की ओर से प्रिंस सोनी को तुरंत किसी तरह की मेडिकल सहायता नहीं दी गई।
छात्र के पिता अमित सोनी का कहना है कि वे लोग अपने बेटे को एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मणिपाल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने उनके बेटे को मृत घोषित कर दिया।
पिता ने क्या बताया?
अमित सोनी ने पत्रकारों को बताया कि बुधवार को स्कूल की ओर से फोन आया कि उनके बेटे की तबीयत खराब है और वह उसे स्कूल से ले जाएं। अमित सोनी ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त से बेटे को स्कूल से लाने के लिए कहा लेकिन हमें यह नहीं बताया गया कि बच्चे की हालत कैसी है?
लड़के के चाचा रवि सोनी का कहना है कि उनके भतीजे और उसके दोस्तों ने स्कूल की कैंटीन से पैटीज खाई थी। इसके बाद उनके भतीजे की तबीयत खराब होने लगी। रवि सोनी ने कहा कि हमें नहीं पता कि पैटीज उसके गले में अटक गई थी या यह पैटीज बासी थी लेकिन इसे खाने के तुरंत बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई।
चाचा का कहना है कि भतीजे के दो और दोस्तों ने भी पैटीज खाई थी और उन्हें भी इसे दिक्कत हुई। चाचा ने कहा कि जब उनके भतीजे की हालत खराब हुई तो स्कूल के प्रशासन को उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
स्कूल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज
डीसीपी (वेस्ट) प्रशांत किरण ने बताया कि पुलिस ने माता-पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए स्कूल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और इस मामले में स्कूल के डायरेक्टर समेत प्रबंधन से जुड़े दो लोगों को पूछताछ के लिए थाने में बुलाया गया है।
कर्मचारियों पर घोर लापरवाही का आरोप
परिवार की ओर से स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य और कर्मचारियों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। परिवार ने कहा है कि स्कूल में प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर उनके बेटे को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया जाता या 108 नंबर की एंबुलेंस बुलाई जाती तो उनके बेटे की जान बच सकती थी।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। इस घटना की वजह से लोग नाराज हो गए और उन्होंने विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दी और स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया।
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