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जॉर्डन के किंग से बोले नरेंद्र मोदी- इस्लामिक विरासत पर हमें गर्व है, आतंक के खिलाफ मुहिम किसी धर्म के खिलाफ नहींं

जॉर्डन के किंग इस वक्त भारत के दौरे पर हैं। वह तीन दिवसीय दौरे के लिए मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। सुबह उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात हुई। पीएम और उनके बीच हैदराबाद हाउस में फिलिस्तीन, आतंकवाद से निपटने और कट्टरपंथियों का सामना करने जैसे अहम मसलों पर चर्चा होगी।

दिल्ली के विज्ञान भवन में गुरुवार को इस्लामिक विरासत के बारे में जॉर्डन के किंग को बताते पीएम। (फोटोः एएनआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस्लामिक विरासत पर उन्हें गर्व है। आतंक के खिलाफ मुहिम किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है। आतंक से लड़ने में मजहब का पैगाम अहमियत रखता है। मजहब का मर्म अमानवीय नहीं हो सकता है। इस्लामिक विरासत से जुड़ी ये बातें पीएम ने गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में कहीं। कार्यक्रम के दौरान जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय भी मौजूद थे। आपको बता दें कि जॉर्डन के किंग इस वक्त भारत के दौरे पर हैं। वह तीन दिवसीय दौरे पर मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। सुबह उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात हुई। पीएम और उनके बीच हैदराबाद हाउस में फिलिस्तीन, आतंकवाद से निपटने और कट्टरपंथियों का सामना करने जैसे अहम मसलों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में पीएम ने बताया कि भारत ने यह संदेश दिया कि पूरी दुनिया एक परिवार है। देश ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश फैलाया। बकौल मोदी, “हर पंथ, संप्रदाय, परंपरा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ही है, इसलिए आज सबसे ज्यादा जरूरत ये है कि हमारे युवा एक तरफ मानवीय इस्लाम से जुड़े हों और दूसरी तरफ आधुनिक विज्ञान और तरक्की के साधनों का इस्तेमाल भी कर सकें।”

पीएम ने आगे अनिश्चतिता और आशंका को आतंकवाद के प्रमुख कारण गिनाया। उन्होंने इसी के साथ कहा, “भारत में लोकतंत्र एक राजनैतिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समानता, विविधता और सामंजस्य का मूल आधार है। यह वो शक्ति है, जिसके बल पर हर भारतीय के मन में आपने गौरवशाली अतीत के प्रति आदर है, वर्तमान के प्रति विश्वास है और भविष्य पर भरोसा है।”

मोदी के अनुसार, “हम हिंसा और आतंकवाद से मुकाबला करने में सक्षम हैं। केवल मजहबों के पैगाम से ही आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है। भारत में सभी को एक साथ लेकर चलने की परंपरा रही है। भारतीय मुसलमान के एक हाथ में आज कुरान है और दूसरे हाथ में कम्प्यूटर है। देश की खुशहाली से ही सभी की खुशहाली जुड़ी है।”

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