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फसलों के समर्थन मूल्य पर विपक्ष फैला रहा है भ्रम : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान अपनी उपज को कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिए भी बेहतर तरीके से बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 25 कृषि विज्ञान केंद्रों का शिलान्यास किया। उन्होंने इस मौके पर कृषि कर्मण और पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए।

Author March 18, 2018 4:58 AM
मोदी ने किसानों से कहा कि खाद्य तेलों की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा तिलहन की पैदावार करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यूरिया खपत को भी 2022 तक घटाकर आधा करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उनकी उत्पादन लागत के डेढ़ गुणा पर तय करने की बजट घोषणा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि समर्थन मूल्य की घोषणा करते समय सभी प्रमुख लागतों को इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस बारे में पहले से ही राज्य सरकारों के साथ काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का किसानों को पूरा लाभ मिले। प्रधानमंत्री पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) मेला ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय कृषि उन्नति मेला-2018 में बोल रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर प्रदूषण कम करने के लिए किसानों से खेतों में फसलों के बचे डंठल और पराली नहीं जलाने की भी अपील की।

मोदी ने किसानों से कहा कि खाद्य तेलों की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा तिलहन की पैदावार करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यूरिया खपत को भी 2022 तक घटाकर आधा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2018-19 के बजट में सरकार ने किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने का फैसला किया है। ‘यह फैसला किया गया है कि सभी अधिसूचित फसलों का एमएसपी उन पर आने वाली लागत का कम से कम डेढ गुना होना चाहिए।’प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के एमएसपी फैसले के बारे में ‘कई लोग भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का माहौल बना रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि फसलों की उत्पादन लागत तय करते हुए उसमें श्रमिक लागत, मशीनों, पशुओं, उर्वरक, बीज पर आने वाला खर्च, राज्य सरकारों को दिया जाने वाला राजस्व, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और पट्टे की जमीन का किराया आदि शामिल किया जाएगा।
मोदी ने कहा कि सरकार कृषि विपणन को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए ग्रामीण मंडियों को एपीएमसी थोक मंडियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल में पेश बजट में ग्रामीण खुदरा कृषि बाजार का प्रस्ताव किया गया है। बाइस हजार ग्रामीण हाटों को जरूरी ढांचागत सुविधाओं के साथ उन्नत बनाने और उन्हें कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) ई- नाम प्लेटफार्म के साथ जोड़ने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान अपनी उपज को कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिए भी बेहतर तरीके से बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 25 कृषि विज्ञान केंद्रों का शिलान्यास किया। उन्होंने इस मौके पर कृषि कर्मण और पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए।

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