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भोदाबाद पंचायत के प्राथमिक विद्यालय के बच्चे गंदा पानी पीने को मजबूर

झारखंड के संथाल परगना में कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों के लिए पीने का शुद्ध पानी तक मयस्सर नहीं है।

झारखंड के संथाल परगना में कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों के लिए पीने का शुद्ध पानी तक मयस्सर नहीं है। इसी में से एक जरमुंडी ब्लाक के भोदाबाद पंचायत के दलदली ग़ांव की उत्क्रमित प्राथमिक स्कूल है। यहां संथाल परिवार के 58 बच्चे पढ़ते हैं। छात्र दोपहर का भोजन करने के बाद बगल के तालाब (जोरियो) में जूठी थाली धोते हैं और उसी का पानी पीने को मजबूर हैं। यह पानी एकदम गंदा है और पीने लायक नहीं है। जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के विधायक बादल पत्रलेख हैं। ये कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं और यह गोड्डा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। यहां के सांसद भाजपा के निशिकांत दुबे हैं। इत्तफाक से झारखंड में भाजपा की सरकार है। पर किसी का ध्यान इस ओर नहीं है।

गोड्डा संसदीय क्षेत्र में विकास के बड़े-बड़े काम होने का दावा सोशल मीडिया पर किया जाता है। हुआ भी होगा। मगर स्कूलों में पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। विकास के दावे की पोल खोलने के लिए यह बानगी काफी है। बीते मंगलवार को वहां जाकर हकीकत जानने की कोशिश की गई। स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल ड्रेस में पढ़ने आए थे। एक नजर में लगा कि यह सुविधा विहीनगांव है और स्कूल के बच्चे संस्कारी हैं जो स्कूल से ज्यादा इनके माता-पिता से इन्हें मिला है। विकास राणा, रूबी लाल सोरेन, अर्जित मुर्मू, सन्नी सोरेन, जिया मुर्मू ने बातचीत में बताया कि स्कूल में पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है।

मध्याह्न भोजन कर बगल के जोरिया में थाली धोते हैं और वही पानी पीते हैं। इस सिलसिले में स्कूल के प्राचार्य बात करने को राजी नहीं हुए। दरअसल स्कूल में बिजली लगाने या बच्चों को दूसरी सुविधा और मध्याह्न भोजन के नाम पर इनकी हेराफेरी चलती है। नतीजतन आला अफसरों के खिलाफ बोल कर शायद कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। मगर स्कूल के सचिव बाबुधन मुर्मू और सहायक शिक्षक कटकी प्रसाद राउत बताते हैं कि इस बाबत कई दफा शिक्षा महकमा को लिखकर गुजारिश की गई है। इनके मुताबिक स्कूल की स्थापना 2002 में हुई है। तब से अभी तक किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। और न ही किसी स्थानीय नेता या दूसरे संगठन ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की है। बल्कि कस्बाई पत्रकार धनंजय कुमार सिंह ने आवाज उठाई तो सभी हाथ धोकर इनके पीछे पड़े हैं। अक्सर नेताओं का जमावड़ा तो लगता है।

मगर इन बच्चों को पेयजल मुहैया कराने पर किसी का ध्यान नहीं है। बगल में जिस तालाब का पानी बच्चे पीते है, वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है। पीने की बात तो दूर है। वह तालाब नहीं नालानुमा है। और पानी एकदम गंदा। अब तक ये बच्चों किसी गंभीर बीमारी की चपेट में नहीं आए। यह बाबा वासुकीनाथ महादेव की ही कृपा और आशीर्वाद है। दुमका में सरकारी सूत्र बताते हैं कि स्कूल में बोरिंग जल्द गाड़ने की योजना बनी है।

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