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यूपी में गोहत्या निरोधक कानून का हो रहा दुरुपयोग! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- निर्दोषों को फंसाया जा रहा

उच्च न्यायालय ने सोमवार को गोहत्या निरोधक कानून, 1955 के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग पर निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: October 26, 2020 7:09 PM
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उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को गोहत्या निरोधक कानून, 1955 के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग पर निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है। उक्त अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत गोहत्या और गोमांस की बिक्री के एक आरोपी रहमुद्दीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा कि इस अधिनियम का दुरुपयोग किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा ” कानून का निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ दुरुपयोग किया जा रहा है। जब भी कोई मांस बरामद किया जाता है, तो बिना किसी फॉरेंसिक जांच या विश्लेषण के इसे सामान्य रूप से गाय के मांस (गोमांस) के रूप में ही दिखाया जाता है। अधिकांश मामलों में, मांस को विश्लेषण के लिए भेजा ही नहीं जाता। आरोपी को ऐसे अपराध के लिए जेल में रखा गया है जो शायद उसने किया ही नहीं। इसके लिए अधिकतम सजा 7 साल तक की है।

ये टिप्पणी तब आईं जब पीठ को सूचित किया गया कि आरोपी-आवेदक एक महीने से अधिक समय से जेल में था, कथित तौर पर एफआईआर में उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया कि आवेदक को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था।

अदालत ने आवेदक को संबंधित अदालत की संतुष्टि के लिए दो समान राशि, एक व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करने की शर्तों के अधीन जमानत दे दी। उच्च न्यायालय ने राज्य में परित्यक्त मवेशियों और आवारा गायों के खतरे के संबंध में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा “”जब भी गायों को बरामद दिखाया जाता है, कोई उचित जब्ती मेमो तैयार नहीं किया जाता है और किसी को नहीं पता होता है कि गाय रिकवरी के बाद कहां गई। गोशालाएं दूध ना देने वाली गायों या बूढ़ी गायों को स्वीकार नहीं करती हैं और उन्हें सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसी तरह दूध देने के बाद गायों का मालिक, गायों को सड़कों पर घूमने के लिए, नाली / सीवर का पानी पीने के लिए और कचरा, पॉलिथीन आदि खाने के लिए छोड़ देता है।”

उच्च न्यायालय ने कहा “सड़क पर गायों और मवेशियों से लिए खतरा होता है और उनके कारण मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी भी रिपोर्ट की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जो पशुपालक अपने पशुओं को खिला नहीं पाते वे उन्हें आवारा छोड़ देते हैं। उन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस के डर से राज्य के बाहर नहीं ले जाया जा सकता है। अब कोई चारागाह नहीं है। इस प्रकार, ये जानवर यहां-वहां भटकते हैं और फसलें नष्ट करते हैं।”

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