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सिख समुदाय ने लगाया धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप, राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से डिलीट करना पड़ा वीडियो

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के सोशल मीडिया अकाउंट से एक अप्रैल को एक वीडियो अपलोड किया गया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया है।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के सोशल मीडिया अकाउंट से बुधवार को एक वीडियो डिलीट किया गया। यह वीडियो ‘मूल मंत्र’ पर एक डांस का था जो गुरु ग्रंथ साहिब की एक रचना है। दरअसल इस वीडियो के अपलोड होने के साथ ही कई सिख समुदायों ने इसकी आलोचना करना शुरू कर दी थी। इन आलोचकों में अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) शामिल हैं।

कहां का था वीडियो: बता दें कि जो वीडियो राष्ट्रपति के अकाउंट पर अपलोड हुआ था वो डांस वीडियो 31 मार्च को चिली के सैंटियागो में राष्ट्रपति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हुआ था। बता दें कि वीडियो राष्ट्रपति के ट्विटर अकाउंट से एक अप्रैल को शाम 7.29 पर अपलोड हुआ था। एक मिनट 22 सेकेंड के वीडियो को कैप्शन दिया गया था- ‘इक ओंकार सतनाम’ पर एक भावपूर्ण अभिनय। वहीं इस पूरे विवाद के बाद राष्ट्रपति की ओर से बयान आया कि राष्ट्रपति असमान रूप से भारत की विविधता को स्वीकार करते हैं… वह गुरु नानक देव के जीवन और संदेश में विश्वास रखते हैं। गौरतलब है कि मूल मंत्र, जिसे बीज मंत्र और गुरु मंत्र भी कहा जाता है। इसकी शुरूआत जपजी साहिब में होती है, जो गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रार्थना है।

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डांस और कार्यक्रम में गाने के लिए नहीं है मूल मंत्र: सेंट्रल यूनिवर्सिटी गुरु गोविंद सिंह के एक प्रोफेसर हरपाल सिंह पन्नू ने कहा- मूल मंत्र जपजी की शुरुआत में आता है। यह महत्वपूर्ण रागों और बानी में भी आता है। लेकिन यह कार्यक्रमों में गाने के लिए नहीं है। इसके साथ ही सिख समुदायों के मुताबिक बैकग्राउंड में मूल मंत्र बजाकर उसपर डांस करना नींदनीय है।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव का क्या है कहना: राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अशोक मलिक ने बुधवार को यह वीडियो राष्ट्रपति के ट्विटर और फेसबुक से हटा दिया। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया, ‘इस हफ्ते की शुरुआत में, राष्ट्रपति कोविंद को चिली की राज्य यात्रा के दौरान सैंटियागो में एक भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। विविध भारतीय समुदाय के सदस्यों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया और कुछ वीडियो राष्ट्रपति के सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किए गए। तब से यह बताया गया है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के कुछ तत्वों (जिनमें राष्ट्रपति सचिवालय की कोई भूमिका नहीं थी) ने हमारे कुछ लोगों की भावनाओं को आहत किया है। भारतीयों के सभी वर्गों के विश्वास और परंपराओं के लिए उत्तरदायी, वीडियो हटा दिए गए हैं।’

 

अकाल तख्त ने कही कार्रवाई की बात: अकाल तख्त के प्रमुख ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को फोन पर बताया कि उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) को इस मामले की गंभीरता से जांच करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एसजीपीसी के सचिव रूप सिंह ने कहा- ‘एसजीपीसी ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। राष्ट्रपति स्वयं ट्विटर पर पोस्ट अपलोड नहीं करते हैं। उनके कार्यालय को यह पता लगाना चाहिए कि किसने इसे अपलोड किया है। उस व्यक्ति को शायद यह पता नहीं था कि इससे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।’ वही इस मामले में एसजीपीस के अध्यक्ष गोबिंद सिंह से बात नहीं हो पाई।

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