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प्राचीन भारत से लेकर 21वीं सदी तक वाराणसी में एक साथ दिखाता है, बनाएंगे एसईजेड : कोविंद

राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन काल से वाराणसी ने उत्तर भारत और पूर्व भारत को गंगा जलमार्ग तथा सड़क मार्ग से जोड़े रखा है। गंगा नदी ने नगर तथा क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता, व्यापार और विकास में विशेष योगदान दिया है। आज इस भावना के नवीनीकरण की आवश्यकता है।

Author March 27, 2018 12:00 AM
राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद। (PTI Photo)

पहली बार बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी आए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद यहां आकर काफी अभिभूत दिखे। अपनी भावनाओं को शब्द देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि काशी पहली बार आना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। निरंतर अस्तित्व में बनी रहने वाली विश्व की सबसे प्राचीन नगरी वाराणसी प्राचीन परम्पराओं को निभाते हुए ‘स्पिरिचुअल सिटी’ से आज ‘स्मार्ट सिटी’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि वाराणसी को आर्थिक विशेष क्षेत्र स्पेशल इकोनामिक जोन (एसईजेड) बनाने के लिए सरकार इन्फ्रास्ट्रक्च र तथा कनैक्टिविटी पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि वाराणसी में प्राचीन भारत से लेकर इक्कीसवीं सदी के भारत को एक ही साथ देखा जा सकता है। यहां एक तरफ आप सब वैदिक-कर्मकांड और गंगा-आरती देखते हैं तो दूसरी ओर आईआईटी-बीएचयू तथा अन्य संस्थानों में आधुनिकतम प्रयोगशालाओं में अनुसंधान कार्य चल रहे होते हैं।

कोविन्द सोमवार को लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने भारत राष्ट्रीय राजपथ प्राधिकरण (एनएचएआई) की पांच परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखी। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं वाराणसी और आस-पास के क्षेत्र की यातायात सुविधा को मजबूत एवं सुगम बनाएंगी जिससे आम जनता का जीवन आसान बनेगा। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षित 10 युवाओं को विभिन्न कंपनियों की ओर से नियुक्ति पत्र भी सौंपे।

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राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन काल से वाराणसी ने उत्तर भारत और पूर्व भारत को गंगा जलमार्ग तथा सड़क मार्ग से जोड़े रखा है। गंगा नदी ने नगर तथा क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता, व्यापार और विकास में विशेष योगदान दिया है। आज इस भावना के नवीनीकरण की आवश्यकता है। राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1, पूर्व मालवाहक गलियारा तथा विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से वाराणसी पूर्वी भारत के लिए उत्तर भारत का द्वार है। उन्होंने कहा कि वाराणसी को आर्थिक विशेष क्षेत्र बनाने के लिए सरकार इन्फ्रास्ट्रक्च र तथा कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में वाराणसी के लिए असीम संभावनाएं हैं और यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का सृजन कर सकता है। वाराणसी के हस्तशिल्प विश्व विख्यात हैं। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि दीन दयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल वाराणसी के कलाकारों की आय बढ़ाने में तथा नौकरियों के सृजन में सहायता प्रदान करेगा। समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक द्वारा संस्कृत में अनूदित पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!’ की पहली प्रति प्राप्त की।

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