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107 साल की ‘वृक्ष माते’ को ‘पद्मश्री’ देकर राष्ट्रपति ने छुए पैर, आशीर्वाद मिला तो बोले- ‘गहराई तक छू गया ये पल’

कर्नाटक के हुलीकल गांव में जन्मीं थिमक्का ने अपने जीवन में करीब 8 हजार पौधे लगाए। करीब 65 सालों तक उन्होंने यह काम किया। अपने लगाए पौधों को पानी देने के लिए उन्हें करीब चार किमी चलना पड़ता था।

107 वर्षीय पद्मश्री महिला से आशिर्वाद लेते रामनाथ कोविंद फोटो सोर्सः ट्विटर

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में शनिवार (16 मार्च) को एक बेहतरीन नजारा देखने को मिला था। मौका था 107 साल की पर्यावरण विद सालुमरादा थिमक्का के सम्मान का। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया। उन्हें ‘वृक्ष माते’ (पेड़ों की माता) के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित करने के बाद उनके पैर छुए। थिमक्का ने भी उनके सिर पर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। हल्के हरे रंग की साड़ी पहनकर आईं थिमक्का ने जब उन्हें आशीर्वाद दिया तो राष्ट्रपति के साथ-साथ मौके पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य मेहमानों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

इस खास लम्हे को राष्ट्रपति ने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा सबसे उम्रदराज पद्मश्री सम्मानित महिला से आशीर्वाद लेना उन्हें अंदर तक छू गया। कोविंद ने ट्विटर पर लिखा, ‘भारत की सबसे अच्छी और सबसे योग्य शख्सियतों को यह अवॉर्ड देना राष्ट्रपति के लिए सम्मान की बात होती है। लेकिन आज जब कर्नाटक की 107 वर्षीय पर्यावरणविद सालुमरादा थिमक्का ने जब आशीर्वाद दिया तो यह मुझे अंदर तक छू गया। थिमक्का इस साल की सबसे उम्रदराज पद्म अवॉर्ड सम्मानित शख्सियत रहीं। थिमक्का भारत के आम नागरिक और खासतौर पर महिलाओं के जज्बे और दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करती हैं।’

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब वे 40 वर्ष की थीं तब गर्भधारण नहीं कर पाने के चलते वे खुदकुशी करना चाहती थीं। लेकिन फिर उन्होंने पति के साथ मिलकर पौधे लगाए और पेड़ों का पालन-पोषण किया, इससे उन्हें शांति मिलती थी। यह दंपती दिन भर पेड़ों के लिए काम करते थे। अपने लगाए पौधों को पानी देने के लिए उन्हें करीब चार किमी चलना पड़ता था। कर्नाटक के हुलीकल गांव में जन्मीं थिमक्का ने अपने जीवन में करीब 8 हजार पौधे लगाए। करीब 65 सालों तक उन्होंने यह काम किया। 1991 में उनके पति का निधन हो गया।

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