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उत्तर प्रदेश में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी

उत्तर प्रदेश के कई जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों पर तबादले की तलवार लटक रही है।

Author लखनऊ | December 8, 2017 5:00 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के कई जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों पर तबादले की तलवार लटक रही है। दरअसल जिन जिलों में अपराध को रोक पाने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है, वहां के पुलिस कप्तान का बोरिया-बिस्तर बांधने का संकेत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दे चुके हैं। ऐसे डेढ़ दर्जन पुलिस कप्तान हैं जिनका तबादला होना तय है। इनके साथ ही आधा दर्जन डीएम भी बदलने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश में एक लाख करोड़ रुपए के पूंजी निवेश में सबसे बड़ा रोड़ा लचर कानून व व्यवस्था है। जिसे दुरुस्त करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआत कर दी है। गोरखपुर में आए दिन होने वाले सनसनीखेज अपराधों को रोकने के लिए 24 नए थाने बनाए जा रहे हैं जबकि मेरठ में 19 नए थाने बनेंगे। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह सवाल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह से बीते दिनों किया था। उनके सवाल पर जो हकीकत सामने आई, उससे मुख्यमंत्री सन्न रह गए।

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उत्तर प्रदेश में दो हजार आठ सौ 91 थानों की दरकार है। पूरे प्रदेश में थानों की कुल संख्या 1463 है। ऐसे में पूरे प्रदेश में 1428 थानों की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने प्रत्येक वर्ष 150 नए थाने खोलने की मंजूरी दी है। गोरखपुर व मेरठ के अलावा गाजियाबाद में पांच, गौतमबुद्धनगर में दो, देवरिया में दो, महाराजगंज में दो, बस्ती में दो, गोण्डा में तीन, बलरामपुर में दो, संत कबीरनगर में पांच, कुशीनगर में दो, बहराइच में दो, सिद्धार्थनगर में दो और श्रावस्ती में एक नए थाने को मुख्यमंत्री ने खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। उत्तर प्रदेश में कानून व व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने के लिए नए थानों के अलावा बड़ी संख्या में तबादलों की तैयारी है। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर अपराध रोक पाने में नाकाम साबित हुए 68 पुलिस उपाधीक्षकों के तबादले कर दिए गए। इनमें गौतमबुद्धनगर, वाराणसी, फैजाबाद समेत प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक जिलों के क्षेत्राधिकारी शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के निशाने पर कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, गौतमबुद्धनगर समेत डेढ़ दर्जन जिलों के एसएसपी और आधा दर्जन जिलों के डीएम हैं। दो माह पूर्व लखनऊ में मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेश के सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से दो-टूक कहा था कि वे किसी भी हाल में अपने जिलों की सुरक्षा को लेकर चौकस रहें। लेकिन प्रदेश में लगभग रोज होने वाली सनसनीखेज आपराधिक वारदातों ने मुख्यमंत्री और उनकी सरकार की नींद हराम कर दी है।

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