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हवा प्रणालियों के पूर्वानुमान में दिक्कत से गलत हो रहीं भविष्यवाणियां

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के उत्तर भारत के लिए मानसून के पूर्वानुमान के सही न होने के पीछे ‘मॉडल्स’ द्वारा भेजे गए गलत सिग्नल, पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के बीच संपर्क के नतीजों का अनुमान लगाने में मुश्किल आदि कुछ प्रमुख कारण हैं।

नई दिल्ली | Updated: July 12, 2021 8:59 AM
सांकेतिक फोटो।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के उत्तर भारत के लिए मानसून के पूर्वानुमान के सही न होने के पीछे ‘मॉडल्स’ द्वारा भेजे गए गलत सिग्नल, पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के बीच संपर्क के नतीजों का अनुमान लगाने में मुश्किल आदि कुछ प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र को गर्मी से राहत न मिलने पर इन वजहों की ओर इशारा किया है।

आइएमडी ने एक महीने पहले पूर्वानुमान जताया था कि मानसून जून तक इन हिस्सों में पहुंच जाएगा लेकिन उसकी भविष्यवाणी अभी तक सही साबित नहीं हुई है। आइएमडी ने 13 जून को अपने पूर्वानुमान में कहा था कि दक्षिणपश्चिम मानसून 15 जून तक दिल्ली पहुंच जाएगा। हालांकि इसके एक दिन बाद उसने कहा कि इस क्षेत्र में मानसून के आने के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। आइएमडी ने एक जुलाई को कहा कि सात जुलाई तक मानसून के पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। बंगाल की खाड़ी से निचले स्तर पर नम पूर्वी हवाओं के आठ जुलाई से पूर्वी भारत के कई हिस्सों तक धीरे-धीरे आने की संभावना है।

पांच जुलाई को आइएमडी ने फिर से कहा कि मानसून 10 जुलाई तक पंजाब और उत्तर हरियाणा के साथ उत्तरपश्चिमी भारत में आ सकता है। हालांकि 10 जुलाई तक भी कोई राहत मिलने के संकेत नहीं मिले। केरल में दक्षिणपश्चिम मानसून के पहुंचने के पूर्वानुमान पर आइएमडी ने कहा था कि यह 31 मई तक दक्षिणी राज्य में पहुंचेगा। 30 मई तक आइएमडी ने अपने दैनिक बुलेटिन में कहा कि केरल में 31 मई के आसपास मानसून के पहुंचने की संभावना है। हालांकि उसी दिन दोपहर को उसने अपने बुलेटिन को संशोधित करते हुए कहा कि तीन जून तक मानसून के पहुंचने की उम्मीद है।इएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि पूर्वानुमान मॉडल्स ने पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के संपर्क में एकरूपता नहीं दिखाई। ये दोनों हवा प्रणालियां मानसून के लिए जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने कहा कि जब दो हफ्तों तक के लिए पूर्वानुमान की बात आती है तो मॉडल्स की सटीकता अच्छी होती है लेकिन जब चार हफ्तों की बात हो तो यह इतनी अच्छी नहीं होती।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने कहा कि पूर्वानुमान मॉडल्स ने गलत सिग्नल दिए। राजीवन ने 35 साल तक दक्षिणपश्चिम मानसून का अध्ययन किया। उन्होंने कहा, ‘मॉडल्स ने मानसून में विराम और एक हफ्ते पहले इसके फिर से सक्रिय होने जैसी कुछ वृहद घटनाओं को अच्छे तरीके से पकड़ा। लेकिन जब केरल में मानसून या उत्तर भारत में बारिश जैसे स्थानीय पूर्वानुमानों की बात आती है तो इसमें कुछ दिक्कत है।’ राजीवन ने कहा, ‘दिल्ली समेत उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मानसून के आगमन के पूर्वानुमान बहुत जल्दी दिए गए। आइएमडी को पूर्वानुमान जारी नहीं करना चाहिए था। उन्हें कुछ और वक्त तक इंतजार करना चाहिए था।’ आइएमडी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाला संस्थान है।

मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली में मानसूनी बारिश अगर रविवार देर रात भी होती है तो यह मानसून में इतनी देरी का यह 19 साल का रेकार्ड होगा। इससे पहले सन 2002 में मानसून ने 19 जुलाई को दिल्ली में दस्तक दी थी। मौसम विभाग के पूवार्नुमान विभाग के महानिदेशक डॉ राजेंद्र कुमार जेनामणि कहते हैं कि बाकी 20 फीसद पूर्वानुमान पूरे सटीक ना बैठने के पीछे मुख्य वजह आॅब्जर्वेटरी, रडार और एयर बैलून की तादाद कम रहना भी है। हमारे मॉडल में कोई कमी नहीं है। स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पालावत बीस फीसद की चूक का कारण भारतीय प्रायद्वीप में मौसम के अनिश्चित और लगातार बदलते मिजाज को बताते हैं। पालावत कहते हैं कि जिस मॉडल पर हम यहां भविष्यवाणी करते हैं और 80 फीसद सच होती हैं उसी मॉडल पर हम अमेरिका, ब्रिटेन या जापान या फिर किसी भी यूरोपीय देश में चले जाएं तो हम भी 95 से 97 फीसद तक पूवार्नुमान सच साबित कर सकते हैं। कसर हमारे अध्ययन और मॉडल में नहीं, बल्कि मौसम के विचलन में है।

दिल्ली सहित उत्तर भारत में कई जगहों पर आज बारिश की संभावना
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने रविवार को बताया कि दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई स्थानों पर सोमवार सुबह तक मूसलाधार बारिश होने की संभावना है।आइएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने यह जानकारी दी।

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