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साबरमती आश्रम में पार्टी नेताओं के बीच बैठीं प्रियंका गांधी, कहा- सरकार हमारी ही बनेगी

58 साल बाद कांग्रेस कार्यसमिती के लिए गुजरात पहुंची कांग्रेस। बैठक से पहले गांधी परिवार साबरमती आश्रम पहुंचा। यहां एक तरफ जहां राहुल गांधी अपनी मां सोनिया के साथ बैठे नजर आए तो वहीं प्रियंका बाकी नेताओं के साथ अलग बैठी नजर आईं।

गांधी आश्रम में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य नेता, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस (जावेद राजा)

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आज (12 मार्च) को कांग्रेस नेता गुजरात में जुटे। करीब 58 साल बाद कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक अहमदाबाद में हो रही है। इससे पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक गुजरात में 1961 में हुई थी। कार्यसमिति की बैठक से पहले सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई कांग्रेसी नेता गांधी आश्रम साबरमती पहुंचे। इस दौरान जो एक खास बात देखने को मिली वो यह कि एक तरफ जहां राहुल गांधी अपनी मां सोनिया के साथ अलग बैठे नजर आए तो वहीं दूसरी ओर प्रियंका गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित बाकी नेताओं के बीच बैठी नजर आईं।

महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि: गांधी परिवार हृदय कुंज आश्रम में भी गए। जहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान एक चरखा भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उपहार के रूप में दिया गया। गौरतलब है कि पहले यह बैठक 28 फरवरी को होने वाली थी लेकिन सीमा पर तनाव के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था।

नेताओं से दूर बैठे नजर आए राहुल गांधी: बता दें कि राहुल गांधी जहां सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बैठे नजर आए तो वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी बाकी नेताओं के साथ बैठी नजर आईं। इस दौरान ज्योतियादित्य सिंधिया और राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी वहां मौजूद थे। इससे पहले दिल्ली में हुई AICC की बैठक में भी प्रियंका गांधी बाकी महासचिवों की तरह हिस्सा लिया था। उनके साथ उस वक्त भी पश्चिम यूपी में पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे। इस दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि लोकसभा चुनाव में इस बार सरकार कांग्रेस की ही बनेगी।

जय जवान जय किसान जन संकल्प रैली: कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने बताया कि बैठक के बाद गांधीनगर के पास अदलाज में त्रिमंदिर में एक जनसभा की जाएगी। इसे जन संकल्प रैली का नाम दिया गया था जिसे बाद में बदलकर जय जवान, जय किसान, जन संकल्प रैली का नाम दिया गया।

 

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