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ईश्वर और इतिहास तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगा अरविंद: प्रशांत भूषण

हाल ही में आम आदमी पार्टी (आप) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाले गए आप के संस्थापक सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम एक चिट्ठी लिखकर उनपर यह आरोप लगाया है कि साल 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल दिल्ली […]

प्रशांत भूषण ने पार्टी से निकाले गए सभी नेताओं के निलंबन को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि वे चुप नहीं बैठेंगे।

हाल ही में आम आदमी पार्टी (आप) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाले गए आप के संस्थापक सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम एक चिट्ठी लिखकर उनपर यह आरोप लगाया है कि साल 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए बेचैन थे।

प्रशांत ने केजरीवाल के नाम ख़त में लिखा, “पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद वह (केजरीवाल) कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से बात करने को बेकरार थे। ताकि उन्हें (राहुल गांधी को) दिल्ली में दोबारा आम आदमी पार्टी सरकार को समर्थन देने के लिए मनाया जा सके। इसके लिए आपने (केजरीवाल ने) निखिल डे से भी बात की थी, लेकिन निखिल ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था।”

दिल्ली में जीत के बाद आपको अपनी सबसे बेहतरीन खूबियां दिखानी चाहिए थीं, लेकिन अफ़सोस है कि जीत के बाद आपने सबसे ख़राब छवि पेश की। आप पर सवाल उठाने वालों को पार्टी से निकाल देना स्टालिन की याद दिलाता है। आपने पार्टी के साथ जो किया है उसके लिए ईश्वर और इतिहास आपको नहीं भूलेगा।

हालांकि चिट्ठी में प्रशांत भूषण ने स्पष्ट तौर पर पार्टी छोड़ने ता कोई उल्लेख नहीं किया है, लेकिन खत के आखिर में लिखे ‘गुड बाई एंड गुड लक’ उनके इस्तीफे की ओर संकेत करता नजर आ रहा है।

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