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किफायती स्वास्थ्यसेवा अभी भी चुनौती : प्रणब

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि किफायती स्वास्थ्यसेवा अभी भी एक चुनौती है। केंद्र और राज्यों की सरकारें कैंसर के इलाज को और अधिक किफायती बनाने का प्रयास कर रही हैं..

Author बंगलुरु | Published on: December 23, 2015 10:46 PM
Pranab Mukherjee, President Pranab Mukherjee, parliament Deadlock, Pranab Mukherjee Angry, Pranab Mukherjee news, Pranab Mukherjee latest newsराष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (पीटीआई फाइल फोटो)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि किफायती स्वास्थ्यसेवा अभी भी एक चुनौती है। केंद्र और राज्यों की सरकारें कैंसर के इलाज को और अधिक किफायती बनाने का प्रयास कर रही हैं। मुखर्जी ने यहां स्टेट कैंसर इस्टिट्यूट आॅफ किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट आॅफ ओंकोलॉजी की बुनियाद रखने के कार्यक्रम में कहा, ‘हमारे लिए किफायती स्वास्थ्यसेवा अभी भी एक चुनौती है। कैंसर के इलाज के लिए जरूरी प्रशिक्षित मानवबल और उपकरणों पर होने वाले भारी निवेश के कारण कैंसर के इलाज का खर्च बढ़ रहा है’। उन्होंने कहा, ‘केंद्र और विभिन्न राज्य कैंसर के इलाज को और अधिक किफायती बनाने के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे रहे हैं’।

उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिवारों के कष्ट कम करने के लिए सतत व सहयोगात्मक बहु-एजंसी प्रयास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत को इस बीमारी का पहले पता लगाने और बीमारी के उचित प्रबंधन के लिए एक प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। साथ ही उसे यह पता लगाने की जरूरत है कि किस तरह से प्रौद्योगिकी का कैंसर के बचाव और उसके इलाज में सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘कैंसर के खिलाफ लड़ाई में उचित और अच्छी तरह से परिभाषित संचार रणनीति प्रमुख कारकों में से एक होगी’।

मुखर्जी ने कहा कि कैंसर के मामले दुनिया भर में बढ़ रहे हैं और भारत में भी पिछले कुछ सालों में ऐसे मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। मुखर्जी ने कहा, ‘आइएमआर के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम से मिले आंकड़े के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है कि शहरी केंद्रों में 15 पुरुषों में से एक और 12 महिलाओं में से एक को कैंसर होने का खतरा रहेगा’।

उन्होंने कहा, ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की ओर से प्रयास किए गए हैं कि कैंसर को राष्ट्रीय स्तर पर एक सूचनीय रोग बनाया जाए ताकि कैंसर और उससे संबंधित मुद्दों पर प्रामाणिक डेटा जुटाया जाए जिससे बीमारी का पता लगाने, इलाज और कैंसर नियंत्रण के लिए संसाधनों का खाका बनाया जा सके’। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा से इस बीमारी की भयावहता समझने और देश के लिए एक अधिक व्यापक और प्रभावी कैंसर देखभाल नीति तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जब कैंसर की बीमारी का पहले पता चल जाता है तब इसके इलाज और प्रबंधन की स्थिति बहुत अलग होती है।

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