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नरेंद्र मोदी के ‘वन मैन शो’ होने के आरोप को जावड़ेकर ने किया खारिज, कहा- विचार-विमर्श से होते हैं फैसले

इस महीने की शुरुआत में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि मोदी एक व्यक्ति वाली ‘राष्ट्रपति व्यवस्था की सरकार’ चला रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वन मैन शो’ चलाने संबंधी आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि राजग सरकार में समाज का ध्रुवीकरण होने की बात का कोई आधार नहीं है। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक नीति निर्धारण प्रक्रिया का अनुसरण कर रही है। सभी बड़े फैसले विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं कभी-कभी सोचता हूं कि हमें अपनी कैबिनेट बैठक का मीडिया तक प्रसारण करना चाहिए। तब आप समझेंगे कि कैबिनेट में क्या लोकतांत्रिक कामकाज होता है। हर कोई अपनी बात रख सकता है, अपनी राय रख सकता है। प्रधानमंत्री कभी दखल नहीं देते। वे सभी विचारों को सुनते हैं और फिर अपनी राय देते हैं कि किस पर विचार होना चाहिए।’

उनसे इस आलोचना के संदर्भ में सवाल किया गया था कि मोदी ने पूरी ताकत अपने हाथ में ले रखी है और बड़े फैसले खुद करते हैं। इस महीने की शुरुआत में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि मोदी एक व्यक्ति वाली ‘राष्ट्रपति व्यवस्था की सरकार’ चला रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या राजग सरकार में समाज का ध्रुवीकरण हो रहा है, जावड़ेकर ने इस तरह के आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार 125 करोड़ भारतीयों की बात करते हैं। उन्होंने कहा, ‘ध्रुवीकरण हमारी सरकार या पार्टी का एजंडा कभी नहीं रहा है। हम एकीकृत भारत के पक्षधर हैं। हम एक लोग, एक राष्ट्र में विश्वास करते हैं। प्रधानमंत्री लोगों के बीच कभी भेदभाव नहीं करते हैं। वे 125 करोड़ लोगों की बात करते हैं। विपक्षी दल सरकार पर हमले के लिए महत्वहीन मुद्दे उठा रहे हैं। विपक्षी दल अपनी बाजी हार चुके हैं। ऐसे में वे किसी वास्तविक मुद्दे से बचते हैं। वे अब कुछ मुद्दे ढूंढने के लिए शोध कर रहे हैं। वे इसी पर अडिग हैं।’

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार उत्तराखंड राजनीतिक संकट से और बेहतर ढंग से निपट सकती थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सरकार के बारे में बात नहीं है। ऐसे हालात थे और राज्यपाल की रिपोर्ट थी। राष्ट्रपति राज्यपाल की रिपोर्ट पर कदम उठाते हैं। चीजें हो रही थीं। परंतु आखिरकार अदालत की भी भूमिका थी और उसने निभाई। इस सवाल पर कि सरकार वादे के मुताबिक काला धन वापस क्यों नहीं ला पा रही है, तो जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए बहुत कुछ किया है। कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए काफी कड़े कानून बनाए गए हैं। कालेधन पर सरकार के पास जो भी जानकारी आती है तो हम इसे तार्किक निष्कर्ष तक ले जाते हैं। हजारों मामलों की पड़ताल चल रही है और सैकड़ों मामले अदालतों में हैं।

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