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कांग्रेस नेता ने पार्टी अॉफिस के बाहर लगाया पोस्टर- प्रशांत किशोर को ढूंढकर लाने वाले को मिलेगा पांच लाख रुपये का इनाम

11 मार्च को जब विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए तो कांग्रेस को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। प्रशांत किशोर ने ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की खोई जमीन को वापस पाने के लिए व्यापक प्लान तैयार किया था।
यूपी कांग्रेस कमिटी के सेक्रेटरी राजेश सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से यह पोस्टर लगाया है।

बलिया जिले के कांग्रेस नेता ने लखनऊ में पार्टी दफ्तर के बाहर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें उन्होंने एेलान किया है कि जो भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को ढूंढकर पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने लाएगा, उसे पांच लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। प्रशांत किशोर को कांग्रेस ने 5 राज्यों के चुनाव के दौरान रणनीति तैयार करने के लिए अपने कैंप में शामिल किया था। बताया जा रहा है कि चुनाव में हार के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। यूपी कांग्रेस कमिटी के सेक्रेटरी राजेश सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से यह पोस्टर लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार पार्टी कार्यकर्ताओं को कुछ सवालों के जवाब चाहिए।

सिंह ने कहा कि पिछले एक साल से हमने बहुत मेहनत की। हमने उन्हें (प्रशांत किशोर) को बिना कुछ कहे फॉलो किया। हमें लगा कि यही पार्टी के लिए बेहतर है, लेकिन अब हमें जवाब चाहिए। वहीं कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष राज बब्बर ने पार्टी कार्यकर्ताओं को तुरंत यह पोस्टर हटाने का निर्देश दिया है। पत्रकारों से बातचीत में राज बब्बर ने कहा कि किसी को चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना अभी जल्दबाजी होगी।

बता दें कि प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की खोई जमीन को वापस पाने के लिए व्यापक प्लान तैयार किया था। लखनऊ में वॉर रूम बनाया गया था। टीम पीके के कार्यकर्ताओं ने हर बूथ का डीएनए खंगाला, वहां का जातिगत और धार्मिक आंकड़ा तैयार किया गया और टिकट को देने में इन आंकड़ों का पूरा ख्याल रखा गया। चर्चा थी कि पीके की टीम में 500 लोग काम कर रहे हैं। लेकिन असम की तरह यहां भी पीके की रणनीति फेल रही। कहा जाता है कि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस और सपा का गठबंधन करवाने में अहम भूमिका निभायी थी और अखिलेश-राहुल की हर साझा रैली की स्क्रिप्ट भी पीके की टीम ही तैयार करती थी।

11 मार्च को जब विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। उत्तराखंड में उसे सिर्फ 11 ही सीटें मिली थीं। जबकि यूपी में उसने सपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, जो फेल हो गया। यूपी में गठबंधन को कुल 54 सीटें मिली थीं। वहीं पंजाब ही इकलौता एेसा राज्य रहा, जहां उसने सरकार बनाई है। मणिपुर और गोवा में ज्यादा सीटें होने के बावजूद वह सरकार नहीं बना पाई।

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