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यूपी में चुनाव से पहले नई जनसंख्या नीतिः समुदायों के बीच “संतुलन” का प्लान, कम प्रजनन दर पर जोर

सरकार की नई जनसंख्या नीति 2021-30 में कहा गया है कि "ये प्रयास भी किया जाएगा की विभिन्न समुदायों के मध्य जनसंख्या का संतुलन बना रहे। जिन समुदायों, संवर्गों एवं भौगोलिक क्षेत्रों में प्रजानन दार अधिक है, उसमे जागरुकता के व्यावसायिक कार्यक्रम चले जाएंगे।"

Translated By सिद्धार्थ राय लखनऊ | Updated: July 12, 2021 8:16 AM
लखनऊ में नई जनसंख्या नीति लॉन्च करते यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (PTI Photo)

उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि राज्य में “विभिन्न समुदायों के बीच जनसंख्या संतुलन सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।” राज्य के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को ‘उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030’ जारी की और कहा कि बढ़ती जनसंख्या समाज में व्याप्त असमानता एवं अन्य समस्याओं की जड़ है तथा समाज की उन्नति के लिए जनसंख्‍या नियंत्रण प्राथमिक शर्त है।

सरकार की नई जनसंख्या नीति 2021-30 में कहा गया है कि “ये प्रयास भी किया जाएगा की विभिन्न समुदायों के मध्य जनसंख्या का संतुलन बना रहे। जिन समुदायों, संवर्गों एवं भौगोलिक क्षेत्रों में प्रजानन दार अधिक है, उसमे जागरुकता के व्यावसायिक कार्यक्रम चले जाएंगे।” मुख्यमंत्री ने लखनऊ के कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ के अवसर पर ‘उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030’ जारी करने के बाद आयोजित समारोह में बढ़ती जनसंख्या की समस्या के प्रति स्वयं तथा समाज को जागरूक करने का प्रण लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के अंदर इस विषय को लेकर समय-समय पर चिंता व्यक्त की गई है कि बढ़ती जनसंख्या विकास में कहीं न कहीं बाधक हो सकती है और उसपर अनेक मंचों से पिछले चार दशकों से निरंतर चर्चा चल रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी की गई नीति का उद्देश्य राज्य में सकल प्रजनन दर कम करना है। राज्य में अभी सकल प्रजनन दर 2.7 प्रतिशत है। इस नीति के जरिए महिलाओं को जागरूक कर इसे 2026 तक 2.1 और 2030 तक 1.9 तक करने की कोशिश है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ‘उप्र राज्य की जनसंख्या के नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण’ विषय पर काम कर रहा है तथा इसने एक विधेयक का प्रारूप तैयार किया है। विधि आयोग ने इस विधेयक का प्रारूप अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है और 19 जुलाई तक जनता से इसपर राय मांगी गई है।

इस विधेयक के प्रारूप के अनुसार इसमें दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है और सरकारी योजनाओं का लाभ न दिए जाने का भी जिक्र है।

मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जिन देशों ने, जिन राज्यों ने इस दिशा में अपेक्षित प्रयास किए, उनके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसमें और भी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उप्र की जनसंख्या नीति 2021-30 जारी करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है, समाज के सभी तबकों को ध्‍यान में रखकर इस नीति को प्रदेश सरकार लागू कर रही है। वास्तव में जनसंख्या नियंत्रण का जो प्रयास है, वह समाज की व्यापक जागरूकता के साथ जुड़ा हुआ है।’’

योगी ने कहा कि हर तबके को इस जागरूकता अभियान के साथ जोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ”दो बच्‍चों के बीच में उचित अंतराल नहीं होगा तो उनके पोषण पर असर पड़ेगा। शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने में कठिनाई होगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में जो प्रयास हुए, उसके अच्छे परिणाम आए हैं लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है। योगी ने कहा, ‘‘यह ध्यान रखना होगा कि जनसांख्यिकी संतुलन पर इसका कोई असर न पड़े और साथ ही माँ व बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य को इसके साथ जोड़ना होगा। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस क्षेत्र में प्रयास किया गया और अभी भी हमारे स्‍तर पर जो नए प्रयास होने हैं, उनमें अंतरविभागीय समन्‍वय से बेहतर कार्य हो सकते हैं।’’

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