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…अगर ऐसा नहीं होगा तो कुछ सालों में दिल्ली बीमारी और आपदाओं का शहर बन जाएगी

डीडीए अगर प्रधानमंत्री की अपील पर ध्यान देकर जल संरक्षण में सहयोग करे तो इलाके में 50 से 100 तालाब पुनर्जीवित किए जा सकते हैं, जो करीब 30 लाख लोगों की पानी की जरूरत पूरी कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | June 7, 2016 3:31 AM
(express Photo)

दिल्ली की आबोहवा दुरुस्त करने की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति हो, तो यमुना पर पिछले साल के एनजीटी के आदेश लागू करने, नई कचरा प्रबंधन नीति पर अमल करने व तालाबों को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जाए और नए वाहनों के अंधाधुंध पंजीक रण पर रोक की दिशा में सरकारें कुछ कर के दिखाएं। ये विचार दिल्ली में काम कर रहे कई पर्यावरणविदों के हैं। इनके मुताबिक, अगर ऐसा नहीं होगा तो कुछ सालों में देश की राजधानी बीमारी और आपदाओं का शहर बन जाएगी।

यमुना जिए अभियान के संस्थापक मनोज मिश्र ने कहा कि दिल्ली की हवा और पानी दुरुस्त करने की दिशा में सरकारों की नीतियां कभी प्रतिबद्ध नहीं दिखी। केवल पांच साल निकालने के हिसाब से वोट बैंक देखे गए। मसलन, दिल्ली जल बोर्ड ने बसंत कुंज और द्वारका जैसे इलाके बसाने से मना किया था। बोर्ड का कहना था कि वह इन इलाकों को पानी नहीं दे पाएगा, लेकिन सरकारों ने उसकी नहीं सुनी और आज यहां पानी का संकट है।

साफ पानी के लिए दूसरी नदियों व दूसरे राज्यों पर निर्भरता बढ़ाने के बजाए बेहतर होगा यमुना को पुनर्जीवित किया जाए। यह सुनिश्चित करना होगा जो पानी यमुना के बहाव में जाए वह साफ हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 13 जनवरी 15 को जो आदेश दिया था उसे ही पूरी तरह लागू कर दिया जाए तो भला होगा। 23 जगहों पर 32 सीवर उपचारित संयंत्र लगे हैं लेकिन कई चलते नहीं, जो चलते हैं वह क्षमता का 50 फीसद सीवर ही साफ कर पाते हैं। तीनों बड़े नाले सही से उपचारित हों तो यमुना में 100 एमजीडी पानी बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण पर काम हो रहा है, चक बनाए जा रहे हैं पर उसकी निगरानी न होने से वे असफल हैं।

नेचुरल हेरिटेज फर्स्ट के संस्थापक दीवान चंद द्वारका सहित तमाम इलाकों में तालाबों को पुनर्जीवित करने का काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि दिल्ली के पुराने तालाबों को ही पुनर्जीवित कर दिया जाए तो पानी की समस्या हल हो सकती है। उपराज्यपाल ने तीन साल पहले उनकी अगुआई में एक समिति बनाई थी। यह सूखे तालाबों को फिर से जलपूर्ण बनाने के लिए काम करती है। इसकी सिफारिशोंं पर डीडीए को काम करना था। पर डीडीए के लचर व गैर-जिम्मेदाराना रवैए के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। निजी प्रयासों से सेक्टर 23 में दो सौ साल पुराना एक एकड़ का तालाब और सेक्टर 20 में 50 साल पुराना 12 एकड़ का तालाब पुनर्जीवित किया गया है। डीडीए अगर प्रधानमंत्री की अपील पर ध्यान देकर जल संरक्षण में सहयोग करे तो इलाके में 50 से 100 तालाब पुनर्जीवित किए जा सकते हैं, जो करीब 30 लाख लोगों की पानी की जरूरत पूरी कर सकते हैं।

चिंतन की चित्रा मुखर्जी ने कहा कि कचरा अलग करने की योजना पर काम करने की जरूरत है। ऐसा कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश पर दक्षिण भारत में किया जा रहा है। कोचीन नगर निगम खाद बनाने वाला जैविक व सूखा कचरा अलग-अलग जमा करता है। दिल्ली में ऐसा केवल एनडीएमसी इलाके में ही होता है। नई कचरा प्रबंधन नीति में कचरा अलग करने की अनिवार्यता है, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं।

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