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सियासत और जमीन- डीएलएफ-वाड्रा

2008 में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट्स हॉस्पिटैलिटिज ने गुड़गांव के शिकोहपुर तहसील में जमीन खरीदी।

Author September 10, 2016 2:08 AM
रॉवर्ट बाड्रा

2008 में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट्स हॉस्पिटैलिटिज ने गुड़गांव के शिकोहपुर तहसील में जमीन खरीदी। पांच बीघा 13 बिसवा (साढ़े तीन एकड़) जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के नाम पर खरीदी गई। आरोपों के मुताबिक, फर्जी कागजात के आधार पर जमीन खरीदी गई। जमीन का सौदा साढ़े सात करोड़ में दिखाया गया। दूसरी ओर चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका की रिपोर्ट के मुताबिक कोई पैसा नहीं दिया गया था। जमीन लेने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने हुड्डा सरकार से जमीन पर कालोनी बनाने का लाइसेंस ले लिया। वाड्रा को लाइसेंस मिल गया और फिर 2008 में ही रॉबर्ट वाड्रा ने जमीन 58 करोड़ रुपए में डीएलएफ को बेच दी। अशोक खेमका की 21 मई 2013 की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि रॉबर्ट वाड्रा ने 50 करोड़ रुपए लेकर डीएलएफ को सस्ते में लाइसेंसशुदा जमीन दिलवाई।

रॉबर्ट वाड्रा ने बिचौलिए का रोल अदा किया और इसके लिए 50 करोड़ रुपए लिए। अशोक खेमका के वकील ने इस पूरे मामले को फर्जीवाड़ा करार दिया था। कहा गया था कि डीएलएफ को कालोनी बनाने के लिए लाइसेंस चाहिए था। इसके लिए उसे कई सौ करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते। लेकिन वाड्रा ने बिचौलिए की भूमिका निभा कर यह काम सिर्फ 50 करोड़ रुपए में करवा दिया। मुद्दे पर हंगामा होने के बाद तत्कालीन हुड्डा सरकार ने एक जांच समिति बनाई जिसने वाड्रा को क्लीन चिट दी। हालांकि उस कमेटी पर भी खेमका ने सवाल खड़े किए थे। अशोक खेमका की दलील थी कि जांच कमेटी में वो लोग शामिल हैं जो खुद जमीन सौदे में शामिल थे।

नेशनल हेरल्ड
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने इस साल धनशोधन का मामला दर्ज किया है। ईडी ने हुड्डा के साथ-साथ नेशनल हेरल्ड समाचार पत्र प्रकाशक, एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के आला अधिकारियों के खिलाफ भी धनशोधन का मामला दर्ज किया है।
इन सभी पर काले धन को सफेद बनाने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने 2005 में हुड्डा और उसके 4 आला अधिकारियों पर एजेएल को पंचकुला में एक भूखंड पुन: आबंटित करने के मामले में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। एजेएल को यह भूखंड पहले 1982 में आबंटित हुआ था। 1996 में इसकी लीज खत्म हो गई थी। उस वक्त बंसीलाल की अगुआई वाली सरकार ने इस जमीन को फिर से अपने कब्जे में ले लिया था। लेकिन 2005 में जैसे ही कांग्रेस ने सत्ता संभाली वैसे ही इस जमीन को फिर से एजेएल को आबंटित कर दिया गया।

हुडा बनाम हुड्डा
हुड्डा औद्योगिक भूखंड आबंटन में फर्जीवाड़े के आरोपों से पहले भी सीबीआइ की जांच के दायरे में रहे हैं। भूखंड आबंटन के समय हुड्डा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के अध्यक्ष थे। आरोप है कि उस समय कई प्लॉट कौड़ियों के भाव आबंटित किए गए थे। जमीन आबंटन को लेकर हुड्डा पर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं और एक समय में तो उनके विरोधी उन्हें भूपिंदर सिंह ‘हुडा’ कहने लगे थे।

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