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जम्मू-कश्मीर: मजिस्ट्रेटों ने हथेलियों पर मुहर लगा राजमार्ग पर जाने की दी अनुमति

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘जम्मू कश्मीर सरकार पहले ही स्पष्ट शब्दों में कह चुकी है कि सप्ताह के सातों दिन में केवल दो दिन, वो भी केवल 12 घंटे के लिए तर्कसंगत पाबंदी लगाई गई है।

जम्मू कश्मीर में बुधवार को राजमार्ग पर आम लोगों की आवाजाही पर रोक के मद्देनजर निगरानी करते सुरक्षाकर्मी।

जम्मू और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाल में लागू यातायात पाबंदी को लेकर राजनीतिक हंगामा बढ़ गया है। इसके मद्देनजर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सप्ताह में सिर्फ दो दिन यह व्यवस्था की गई है और यह केवल 31 मई तक प्रभावी रहेगा। मंत्रालय ने कहा कि जम्मू और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाल ही में लागू यातायात पाबंदी के बारे में जानबूझकर और शरारतपूर्ण भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं।

दूसरी तरफ, केंद्र के आदेश के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस लामबंद हो गए हैं। बुधवार को नेकां के नेता उमर ने श्रीनगर में राजमार्ग पर धरना दिया। इस बीच, राजमार्ग पर असैनिक वाहनों पर रोक के दूसरे दिन बुधवार को कश्मीरी निवासियों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि राज्य द्वारा नियुक्त मजिस्ट्रेटों ने यात्रियों की हथेलियों पर या कागज पर मुहर के जरिए अनुमति देते हुए लोगों को कुछ राहत प्रदान की। विभिन्न चौराहों पर बुजुर्गों और महिलाओं सहित कई लोग राज्य सरकार द्वारा नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेटों और सुरक्षा बलों से अनुरोध करते देखे गए। यह राजमार्ग बुधवार और रविवार को नागरिक यातायात के लिए बंद रहेगा।  गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘जम्मू कश्मीर सरकार पहले ही स्पष्ट शब्दों में कह चुकी है कि सप्ताह के सातों दिन में केवल दो दिन, वो भी केवल 12 घंटे के लिए तर्कसंगत पाबंदी लगाई गई है। बलों के सुरक्षित आवागमन के लिए और जनता को होने वाली असुविधा को कम से कम करने के लिए यह किया गया है।’ मंत्रालय ने कहा कि सप्ताह में 168 घंटे में से केवल 24 घंटे की पाबंदी है। बयान के अनुसार, ‘जवानों के काफिले के जाने के दौरान नागरिकों के यातायात के लिहाज से नियम पहले से प्रभाव में हैं, वहीं राज्य सरकार ने अब 31 मई, 2019 तक की छोटी अवधि के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों की योजनाबद्ध आवाजाही के लिए यह किया है।’ मंत्रालय ने कहा कि विशेष रूप से 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले की पृष्ठभूमि में जवानों की सुरक्षा के लिए केवल 15 दिन के लिए नियम लागू किया गया है। राज्य के गृह सचिव शालीन काबरा द्वारा तीन अप्रैल को जारी एक आदेश के मुताबिक उत्तर कश्मीर में बारामुला से जम्मू क्षेत्र में उधमपुर तक असैन्य यातायात की आवाजाही की इजाजत 31 मई तक रविवार और बुधवार के दिनों में नहीं होगी।

हालांकि, विपक्षी दलों पीडीपी और नेकां ने सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए लोगों से इसका विरोध करने की अपील की है। साथ ही, केंद्र को आगाह किया है कि वह इजराइल-फलस्तीन जैसी स्थिति जम्मू-कश्मीर में पैदा कर रही है। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्य प्रशासन के उस आदेश की अवज्ञा करने के लिए एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इस आदेश को वापस लिए जाने की मांग करते हुए अब्दुल्ला अपने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ शहर के बाहरी इलाके में स्थित पंथा चौक के निकट राजमार्ग पर धरने पर बैठ गए। उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘जिस दिन से यह तुगलकी फरमान जारी हुआ है, उसी दिन से हम सरकार से इस पर दोबारा विचार करने के लिए कह रहे हैं।’ पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने लोगों से राजमार्ग पाबंदी नहीं मानने की बुधवार को अपील करते हुए केंद्र सरकार को जम्मू कश्मीर के साथ संबंधों को इजराइल-फलस्तीन जैसे संघर्ष में तब्दील किए जाने के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने कहा कि राजमार्ग के इस्तेमाल पर लगाया गया प्रतिबंध जम्मू कश्मीर के लोगों का दमन करने की कोशिश है और यह राज्य की अर्थव्यवस्था और लोगों के मूल अधिकारों पर हमला है। विरोध के मद्देनजर पंथा चौक पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। बुधवार को सुरक्षा बल वहां लोगों को सड़क किनारे खड़े एक वाहन में भेजते देखे गए, जिसमें ड्यूटी मजिस्ट्रेट लोगों के अनुरोधों पर विचार कर रहे थे और सड़क पर चलने के लिए विशेष अनुमति दे रहे थे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए अधिकारियों के हस्ताक्षर से लोगों को सुरक्षा जांच को पार करने और राजमार्ग पर स्वतंत्र रूप से चलने की अनुमति दी जा रही है।

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