पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब में राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किया है। इसे लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार शाम कैबिनेट की एक इमरजेंसी बैठक बुलाई है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के करीब एक महीने बाद, केंद्र ने शनिवार को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति की घोषणा की। जस्टिस अश्वनी कुमार जून से ही हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे हैं।

क्यों अहम है यह कैबिनेट मीटिंग?

भगवंत मान की ओर से बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग इसलिए अहम है क्योंकि जब नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी, तब पंजाब सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र को अपना जवाब नहीं भेजा था। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने राज्य सरकार को राय के लिए सिफारिश भेजी थी, लेकिन पंजाब ने अभी तक अपनी बात नहीं बताई थी। राज्य की ओर से कोई जवाब न मिलने के बावजूद केंद्र ने नियुक्ति की घोषणा कर दी।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जालंधर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार नियुक्ति की प्रक्रिया से सहमत नहीं है। हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।

‘गंभीर और संवेदनशील है मामला’

हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह घटनाक्रम राज्य के संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर हमले जैसा है। यह मामला गंभीर और संवेदनशील है।” उन्होंने बताया कि रविवार शाम 4 बजे पंजाब कैबिनटे की एक इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है। उम्मीद है कि कैबिनेट राज्य के अधिकारों, इस नियुक्ति के फेडरल असर और मामले के कानूनी व संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा करेगी। हरपाल सिंह चीमा के अनुसार, बैठक में सरकार की आगे की कार्रवाई और इस मुद्दे पर रणनीति पर भी चर्चा होगी।

टकराव होने की संभावना

पंजाब सरकार की ये आपत्तियां ऐसे समय में आई है जब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर फिर से बहस छिड़ गई है, खासकर न्यायपालिका, केंद्र सरकार और राज्य की संवैधानिक भूमिकाओं को लेकर। इमरजेंसी कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की ओर अपने अगले कदमों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। कैबिनेट बैठक में नियुक्ति, केंद्र की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया और पंजाब सरकार के पास उपलब्ध कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है।

इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर टकराव होने की संभावना है, क्योंकि भगवंत मान सरकार लगातार पंजाब के संवैधानिक और फेडरल अधिकारों का मुद्दा उठा रही है।

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में तबादला हुआ था। तत्कालीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू का सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद जस्टिस अश्विनी कुमार ने इसी साल जून में एक्टिंग चीफ जस्टिस का पद संभाला था।

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