केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में गर्म होती सियासत के बीच सभी राजनीतिक दल महिलाओं के सहारे चुनावी नैया पार लगाने में जुटे हैं। प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले करीब पांच फीसद ज्यादा है। इनमें से बड़ी संख्या में महिलाएं मध्यम व गरीब परिवारों से जुड़ी हैं। ऐसे में इन्हें रोजगार के साथ दूसरी तरह से आर्थिक मदद देने का वादा कर लुभाने की कोशिश की गई है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार केरल में कुल मतदाताओं की संख्या 2.70 करोड़ हैं। इनमें महिलाओं की संख्या 1.38 करोड़ और पुरुषों की संख्या 1.31 करोड़ है। महिलाओं की इस मजबूत जनसंख्या हिस्सेदारी को देखते हुए प्रदेश के तीनों प्रमुख गठबंधन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने अपने प्रचार और घोषणापत्र में महिला हितों को प्राथमिकता दी है।

यूडीएफ ने अपने चुनावी वादों में महिलाओं और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। गठबंधन ने कालेज जाने वाली लड़कियों के लिए एक हजार मासिक भत्ता देने के अलावा सामाजिक कल्याण पेंशन को बढ़ाकर तीन हजार रुपए करने, महिलाओं को राज्य की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का वादा भी किया गया है।

एलडीएफ, यूडीएफ, राजग के वादे: रोजगार, आर्थिक मदद और सुरक्षा

वहीं एलडीएफ ने राज्य में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी को 50 फीसद तक बढ़ाने, घरेलू महिलाओं के लिए नौकरियों के अवसर बढ़ाने सहित दूसरे वादे किए हैं। जबकि राजग ने गरीब महिलाओं को ढाई हजार रुपए तक आर्थिक मदद, त्योहार पर मुफ्त सिलेंडर सहित दूसरे सुविधा देने का वादा किया है।

स्थानीय नेताओं की माने तो उम्मीदवार की जीत में महिलाओं की भागीदारी बड़ी गारंटी होती है। अधिकतर सीटों पर यह निर्णायक की भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में महिलाओं को दिए गए सीधे लाभ के अलावा उनके घर खर्च का असर चुनावी परिणाम में दिखता है। केरल से कांग्रेस सांसद हिबी जार्ज ईडन ने कहा कि गठबंधन ने हमेशा से प्रदेश की महिलाओं का ध्यान रखा है।

राज्य में सरकार के दौरान महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई, शिक्षा सहित दूसरे क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया। इनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए, लेकिन एलडीएफ गठबंधन की सरकार में महिलाओं की समस्याएं बढ़ गई हैं। महंगाई के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। सभी जरूरी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। साथ ही राज्य में महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित हुई है।

एर्नाकुलम में सबसे ज्यादा महिलाएं

राज्य में चुनाव लड़ रही महिलाओं के मामले में सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवार एर्नाकुलम जिले में देखने को मिली है। प्रदेश के तीनों बड़े गठबंधन ने प्रदेश के 140 सीटों में से करीब 40 सीटों पर करीब 46 उम्मीदवारों को उतारा है। एलडीएफ ने करीब 18 महिला उम्मीदवार को टिकट दिया है। इनमें सीपीआइ(एक) ने 12, सीपीआइ ने पांच और केरल कांग्रेस (एम) ने एक उम्मीदवार को टिकट दिया। राजग ने 16 महिला, यूडीएफ ने करीब 12 महिलाओं को मैदान में उतारा है। इसमें कांग्रेस की तरफ से नौ, आइयूएमएल से दो और आरएमपीआइ से एक उम्मीदवार चुनावी मैदान में है। एर्नाकुलम जिले की 14 सीटों पर सबसे अधिक करीब छह महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं।

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असम, केरल, पुदुचेरी (केंद्रशासित प्रदेश), तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 9, 23 और 30 अप्रैल को होंगे। हाल के वर्षों में पहली बार भाजपा केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में स्थापित वाम-उदारवादी राजनीतिक दलों को चुनौती दे रही है। वैचारिक दृष्टि से केरल में यूडीएफ यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, दोनों ही वाम केंद्रित हैं। तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन (जिसमें कांग्रेस भी शामिल है) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस स्पष्ट रूप से वाम-उदारवादी दल हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक