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बीते 9 महीनों में राजनीतिक पार्टियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए जुटाए 1046 करोड़ रुपए

अगर किसी भी राजनीतिक पार्टी को पिछली लोकसभा या फिर विधानसभा चुनाव में एक प्रतिशत वोट मिला है तो वो इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डोनेशन ले सकता है।

प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स, इंडियन एक्सप्रेस)

चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के द्वारा पैसों का इस्तेमाल काफी किया जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक राजनीतिक दलों ने पिछले नौ महीनों में इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए करीब 1,045.53 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस बात की जानकारी वित्त राज्यमंत्री ने उच्च सदन राज्यसभा में दी है। पार्टियों को मिलने वाली फंडिंग को पारदर्शी बनाने के मकसद से सरकार ने इस साल जनवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की थी। जिसके तहत मेट्रो शहरों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चार मुख्य शाखाओं से कोई भी शख्स या संस्था KYC नियम पूरे करके ये बॉन्ड खरीदकर अपनी पसंद की पार्टी को दान में दे सकती है।

इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डोनेशन लेने का क्या हैं नियम?

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को सरकार ने छह चरणों में जारी किया था। सबसे पहले इसे मार्च में केवल 10 दिन के लिए जारी किया गया था। उसके बाद नवंबर तक लगभग 1,056.73 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे गए। जिसमें से 1,045.53 करोड़ रुपए के बॉन्ड राजनीतिक पार्टियों ने कैश करवाए। बता दें, अगर किसी भी राजनीतिक पार्टी को पिछली लोकसभा या फिर विधानसभा चुनाव में एक प्रतिशत वोट मिला है तो वो इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डोनेशन ले सकता है।

इलेक्टोरल बॉन्ड 10 दिनों के लिए जारी किए जाते हैं। आम चुनावों के साल में 30 दिन का अधिक समय दिया जाता है। इन बॉन्ड की वैलिडिटी, जारी करने के बाद 15 दिनों तक होती है। जिसके दौरान इसे कैश करवाना होता है। ये बॉन्ड एक हजार, दस हजार, एक लाख, दस लाख और एक करोड़ रुपए की वैल्यू के होते हैं। इन पर डोनर या जिस पार्टी को डोनेट किया जा रहा है उसकी जानकारी नहीं होती।

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