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बिहार चुनाव का जातीय गणित: 14% आबादी वाले यादव वर्ग के 91 उम्मीदवार, EBC है काफी अहम

बिहार में राजनीतिक पार्टियां जातीय समीकरण बिठाने के साथ धार्मिक मुद्दे पर भी वोट जुटाने की कोशिश कर रही हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पटना | Updated: October 16, 2020 7:56 AM
Bihar Election, EBC Votes, Yadavबिहार चुनाव में राजद, जदयू और भाजपा तीनों की ही नजर इस बार अति-पिछड़ा वर्ग के वोटों पर है। (एक्सप्रेस फोटो)

बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब दो हफ्ते से भी कम का समय रह गया है। इस बार राज्य में ज्यादातर पार्टियां सामने से तो विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात कर रह हैं, पर अंदर ही अंदर प्रमुख क्षेत्रों में उम्मीदवारों की लिस्ट में जातीय समीकरणों का भी ध्यान रखा जा रहा है। हर बार की तरह ही इस बार भी राज्य में यादव उम्मीदवारों का बोलबाला है। बिहार की आबादी में यादवों की कुल संख्या करीब 14 फीसदी है, हालांकि विधानसभा चुनाव में अब तक एनडीए और महागठबंधन की ओर से इस वर्ग के 91 प्रत्याशियों के टिकट पक्के किए गए हैं। यानी 14% आबादी के वोट पाने के लिए पार्टियां अब तक करीब 37 फीसदी यादव उम्मीदवारों को टिकट दे चुकी हैं।

यादव उम्मीदवारों को टिकट देने में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी राजद सबसे आगे है। महागठबंधन में राजद ने अब तक 144 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसमें 58 प्रत्याशी यानी करीब 40% उम्मीदवार यादव वर्ग से हैं। वहीं, एनडीए गठबंधन की बात की जाए, तो जदयू ने अपनी 115 उम्मीदवारों की लिस्ट में 17 यादव उम्मीदवारों को टिकट दिया है। भाजपा ने भी घोषित की गई 110 सीटों में 16 यादवों को उतारा है।

दूसरी तरफ चुनाव में इस बार अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) भी पार्टियों के एजेंडे के केंद्र में हैं। बिहार की आबादी में 25 फीसदी हिस्सा इस अति-पिछड़ा वर्ग का ही है। जहां राजद ने इस वर्ग के 24% उम्मीदवार उतारे हैं, वहीं जदयू ने इस वर्ग के 26 फीसदी प्रत्याशियों को टिकट देने का फैसला किया है।

राजनीतिक पार्टियां बिहार में जातीय समीकरण बिठाने के साथ धार्मिक मुद्दे पर भी वोट जुटाने की कोशिश कर रही हैं। जहां राजद ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए इस वर्ग के 12% यानी कुल 17 उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं जदयू ने कुल 11 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट थमाया है। हालांकि, भाजापा ने एक भी मुस्लिम नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया। पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने सिर्फ एक ही मुस्लिम चेहरे को चुनाव लड़ाया था।

पार्टियों के लिए क्या है अति-पिछड़ा वर्ग का गणित: इस चुनाव में बिहार की तीनों ही प्रमुख पार्टियां- जदयू, राजद और भाजपा अति-पिछड़ा वर्ग के वोट जीतने की कोशिश में हैं। इस वर्ग में साहनी और धनुक दो मुख्य जातियां हैं। जदयू के 26 EBC उम्मीदवारों में सात धनुक हैं, वहीं भाजपा की ओर से पांच अति-पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी हैं। हालांकि, भाजपा ने गठबंधन की साथी मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी के लिए 11 सीटें छोड़ी हैं। यह पार्टी मल्लाह समुदाय की है।

दूसरी तरफ राजद ने जो 24 उम्मीदवार अति-पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं, उनमें 7 नोनिया हैं। एक वरिष्ठ राजद नेता के मुताबिक, “हमने EBC वर्ग को जीतने के लिए गंभीरता से विचार किया है। जहां मुस्लिम-यादव हमारी लिस्ट में ऊपर हैं, वहीं अति-पिछड़ा वर्ग भी आगे रखे गए हैं।”

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